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कालसर्प योग 2026: राहु-केतु की स्थिति से बना कालसर्प योग धनु-मीन-तुला समेत इन राशियों को मिल सकता है बड़ा लाभ; जानें प्रभाव और उपाय

वैदिक ज्योतिष में कालसर्प योग को बेहद महत्वपूर्ण योग माना जाता है। यह योग तब बनता है जब सभी ग्रह राहु और केतु के बीच आ जाते हैं। वर्ष 2026 में बनने वाला कालसर्प योग कई राशियों के जीवन में बड़े बदलाव ला सकता है। ज्योतिष गणनाओं के अनुसार यह योग जहां कुछ लोगों के लिए चुनौतियां और उतार-चढ़ाव लेकर आ सकता है, वहीं कुछ राशियों के लिए अचानक सफलता, धन लाभ और करियर में तरक्की के अवसर भी दे सकता है।

कालसर्प योग 2026: राहु-केतु की स्थिति से बना कालसर्प योग धनु-मीन-तुला समेत इन राशियों को मिल सकता है बड़ा लाभ; जानें प्रभाव और उपाय
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कालसर्प योग 2026: राहु-केतु की स्थिति से बना कालसर्प योग, इन राशियों को मिल सकते हैं बड़े लाभ; जानें प्रभाव और उपाय

Kaal Sarp Yog 2026: वैदिक ज्योतिष के अनुसार जब सभी ग्रह राहु और केतु के बीच आ जाते हैं, तब कालसर्प योग बनता है। यह योग कई बार जीवन में उतार-चढ़ाव और चुनौतियों का कारण बनता है, लेकिन कुछ स्थितियों में यह अचानक सफलता और लाभ भी दे सकता है। ज्योतिष गणना के अनुसार वर्ष 2026 में बनने वाला कालसर्प योग कुछ राशियों के लिए विशेष रूप से लाभकारी साबित हो सकता है। आइए जानते हैं इस योग का प्रभाव, किन राशियों को फायदा मिलेगा और इससे जुड़े उपाय क्या हैं।

कब बनता है कालसर्प योग?

कालसर्प दोष को कुंडली का एक बड़ा दुर्योग माना जाता है। यह दोष तब बनता है जब राहु और केतु के बीच बाकी सभी ग्रह आ जाते हैं। ऐसी स्थिति में कुंडली का आधा भाग खाली हो जाता है। सभी ग्रहों के राहु-केतु के बीच में आ जाने से कालसर्प योग बनता है। अगर किसी जातक की कुंडली में कालसर्प दोष बनता है तो उसके जीवन में संघर्ष बढ़ जाता है। मन अशांत रहता है। स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। शिक्षा, व्यापार पर किसी न किसी तरह की बाधाएं आने लगती हैं। वैवाहिक जीवन में भी समस्याएं बनी रहती हैं परिवार में कलह से लेकर दोस्तों के बीच भी दरार आ जाती है। हालांकि कुछ मामलों में सकारात्मक प्रभाव भी देखने को मिलता है, जो ग्रहों की स्थिति पर निर्भर है।

कालसर्प दोष बनने से इन राशियों को मिल सकता है लाभ

धनु राशि (Sagittrius Zodiac)

धनु राशि के जातकों की कुंडली में लग्न के स्वामी देवगुरु बृहस्पति सप्तम भाव में वक्री अवस्था में विराजमान है, जो 11 मार्च को मार्गी हो जाएंगे। इसके अलावा सूर्य, मंगल, बुध और राहु तीसरे भाव में, शनि-शुक्र चौथे भाव में विराजमान है। इसके साथ ही इस राशि की शनि की ढैया चल रही है। सूर्य 15 मार्च को चौथे भाव में आएंगे। वहीं केतु नवम भाव में गोचर कर रहे हैं। ऐसे में राहु तीसरे भाव में और केतु नवम भाव में है। ऐसे में बाकी ग्रह इनके बीच आ आ गए हैं। जिसके कारण आपकी कुंडली के दसवें, ग्यारहवें, बारहवें, लग्न और दूसरे भाव खाली रह जाते हैं, जिन्हें सुप्त भाव माना जाता है।

मीन राशि (Pisces Zodiac)

मीन राशि के जातकों के लिए कालसर्प योग परेशानी बढ़ा सकता है। लेकिन कुछ ग्रहों की स्थिति के कारण आपको लाभ मिल सकता है। आपकी राशि में शेषनाग नाम का कालसर्प योग बन रहा है, जो छठे और बारहवें भाव से बनता है। इसके कारण इस राशि के जातकों को मुकदमे, रोग, चोट, दुर्घटना और खर्च बढ़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इस माह कुछ सकारात्मक योग भी बन रहे हैं। गुरु 11 मार्च से मार्गी होंगे। ऐसे में करियर और शिक्षा के क्षेत्र में काफी लाभ मिल सकता है। विदेश से जुड़े अवसर मिल सकते हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में लाभ मिलने के योग बन रहे हैं। सुख-सुविधाओं की तेजी से वृद्धि हो सकती है। गुरु सप्तम भाव में विवाह व दांपत्य सुख में खुशियां ला सकते हैं।

तुला राशि (Libra Zodiac)

तुला राशि के लिए पद्म नाम का कालसर्प योग बन रहा है, जो पंचम और ग्यारहवें भाव से संबंधित है। इसका प्रभाव संतान, भाई-बहनों और भाग्य पर पड़ सकता है। ऐसे में थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत है। इसके अलावा कुछ अन्य ग्रहों की स्थिति के कारण कुछ क्षेत्रों में आपको लाभ मिल सकता है। बता दें कि मार्च में आपकी गोचर कुंडली के पंचम भाव में सूर्य, मंगल, बुध और राहु विराजमान है, जबकि छठे भाव में शनि, शुक्र होंगे और 15 मार्च को सूर्य भी आ जाएंगे, जिससे त्रिग्रही योग बनेगा। देवगुरु बृहस्पति भाग्य भाव में वक्री अवस्था में है लेकिन 11 मार्च को मार्गी होंगे। केतु 11वें भाव में गोचर कर रहा है। ऐसे में पंचम, 12वां, लग्न, दूसरा, तीसरा और चौथा भाव रिक्त हैं, जिससे प्रबल कालसर्प दोष बन गया है। हालांकि यह दोष आंशिक रूप से ही रहेगा। भाव देगी।

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