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गुरु पुष्य योग 2026: कब है, शुभ मुहूर्त, महत्व, दुर्लभ योग और 12 राशियों पर प्रभाव

वैदिक ज्योतिष में गुरु पुष्य योग को सबसे शुभ और फलदायी योगों में से एक माना जाता है। जब गुरुवार के दिन पुष्य नक्षत्र का संयोग बनता है, तब गुरु पुष्य योग का निर्माण होता है। वर्ष 2026 में बनने वाला यह विशेष योग कई दुर्लभ और शुभ ग्रह योगों के साथ आ रहा है, जिससे इसका महत्व और अधिक बढ़ गया है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस योग में किए गए धार्मिक कार्य, निवेश, खरीदारी, शिक्षा की शुरुआत, व्यवसाय विस्तार और नए कार्यों का आरंभ विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

गुरु पुष्य योग 2026: कब है, शुभ मुहूर्त, महत्व, दुर्लभ योग और 12 राशियों पर प्रभाव
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गुरु पुष्य योग 2026: कब है, महत्व और किन राशियों को मिल सकता है लाभ

गुरु पुष्य योग को ज्योतिष शास्त्र में अत्यंत शुभ और फलदायी योग माना जाता है। जब गुरुवार (गुरु वार) के दिन पुष्य नक्षत्र का संयोग बनता है, तब गुरु पुष्य योग का निर्माण होता है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इस योग में किए गए शुभ कार्य, निवेश, खरीदारी, पूजा-पाठ और नए कार्यों की शुरुआत विशेष रूप से मंगलकारी मानी जाती है।

वैदिक पंचांग के अनुसार, पुष्य योग 18 जून को सुबह 05:45 बजे से आरंभ हो रही है, जो सुबह 11:32 बजे समाप्त हो रहा है। गुरुवार के दिन होने के कारण इसे गुरु पुष्य योग कहा जाएगा। इसके साथ ही इस दिन सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि योग का भी निर्माण हो रहा है।

वैदिक ज्योतिष शास्त्र में गुरु पुष्य योग के तीन प्रकार के विशेष संबंध बताए गए हैं। इस दि गुरु पुष्य योग का निर्माण हो रहा है। इसके साथ ही रात 18 09:32 पी एम बजे गुरु पुष्य नक्षत्र में प्रवेश भी कर रहे हैं। मीन राशि के स्वामी बृहस्पति का चंद्रमा की राशि कर्क में होना और वहां उच्च स्थिति प्राप्त करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह प्रेम, सहजता और अमृतमय संबंधों का प्रतीक है। इसी कारण इसे पंच पुष्यामृत योग कहा गया है। इस समय बृहस्पति हंस योग, गजकेसरी योग और अन्य शुभ योगों के साथ विशेष प्रभाव प्रदान करता है।

18 जून को बन रहे कई दुर्लभ योग

बता दें कि 18 जून को गुरु पुष्य के साथ बुधादित्य योग, गजकेसरी योग, हंस योग, लक्ष्मी योग और रुचक योग जैसे शुभ योगों का निर्माण भी हो रहा है। ऐसे में भाग्य स्थान का स्वामी उच्च राशि में होना और चंद्रमा का उसी राशि में स्थित होना इस योग को और प्रभावशाली बनाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह समय अत्यंत शुभ माना जाता है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, इन योगों का प्रभाव व्यक्ति के जीवन में उन्नति, सफलता और शुभ अवसरों को बढ़ाने वाला हो सकता है।

गुरु पुष्य योग में कर सकते हैं ये शुभ कार्य

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, गुरु पुष्य योग बनने से कई शुभ कार्यों की शुरुआत हो सकती है। इस दिन विद्यारम्भ संस्कार, यज्ञोपवीत संस्कार, धार्मिक कार्य, मंत्रों का उच्चारण, दीक्षा से लेकर नए कार्यों की शुरुआत करना लाभकारी हो सकता है। इसके अलावा इस दिन सोना, चांदी, आभूषण, वाहन, बर्तन और अन्य शुभ वस्तुओं की खरीदारी करना भी अच्छा हो सकता है। भूमि, भवन, संपत्ति या किसी बड़े निवेश की शुरुआत के लिए भी इस योग को अनुकूल माना जाता है।

गुरु पुष्य योग का 12 राशियों पर प्रभाव

पंडित केपी शुक्ल के अनुसार, गुरु पुष्य योग बनने से 12 राशियों के जीवन में किसी न किसी तरह से प्रभाव देखने को मिल सकता है। विशेषकर मेष, वृषभ, कर्क, कन्या, धनु, मकर और मीन राशि के जातकों के जीवन में अधिक सकारात्मक असर देखने को मिल सकते हैं। इसके साथ ही तुला राशि के जातकों को उन्नति के साथ नौकरी में नए अवसर मिल सकते हैं।

गुरु पुष्य योग में करें ये उपाय

गुरु पुष्य योग के समय पीली चीजों का दान देना लाभकारी हो सकता है। इसलिए इस दिन चने की दाल, बेसन के लड्डू, केला, केसर, खीर आदि का दान कर सकते हैं। इसके अलावा वस्त्र, अनाज या फिर धन का दान कर सकते हैं। गाय को हरा चारा खिलाना लाभकारी हो सकता है। इससे कुंडली में गुरु की स्थिति भी मजबूत हो सकती है।

गुरु पुष्य काल में राहुकाल

ज्योतिष परंपरा के अनुसार, जब कोई विशेष योग पूरे दिन प्रभावी माना जाता है तो शुभ कार्यों के लिए पूरे दिन का उपयोग किया जा सकता है। हालांकि कुछ लोग राहु काल को ध्यान में रखकर शुभ कार्यों का समय निर्धारित करते हैं। 18 जून को राहु काल के समय को लेकर अलग-अलग स्थानों के अनुसार समय में अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग के अनुसार समय देखना उचित माना जाता है।

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