विशाखा बिछुड़ा कब लगेगा September 2026 | Aaj Bichuda Kab Lagega | September Bichuda 2026 | Vidar Bichuda Kab Lagega | विदर बिछुड़ा कब लगेगा सितम्बर 2026
सितंबर 2026 माह का विशाखा बिछुड़ा (विंछुड़ो/विदर बिछुड़ा) 16 सितंबर 2026 से 18 सितंबर 2026 तक रहेगा।

सितंबर 2026 में विशाखा बिछुड़ा कब है?
सितंबर 2026 माह का विशाखा बिछुड़ा (विंछुड़ो/विदर बिछुड़ा) 16 सितंबर 2026 से 18 सितंबर 2026 तक रहेगा।
आरम्भ: 16 सितंबर 2026, बुधवार, प्रातः 10:49 बजे
समाप्ति: 18 सितंबर 2026, शुक्रवार, रात्रि 10:45 बजे
इस पूरी अवधि में कोई भी नया या शुभ कार्य शुरू करने से पहले सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
विशाखा बिछुड़ा या विदर बिछुड़ा (विंछुड़ो) क्या होता है?
जब चंद्रमा वृश्चिक राशि में गोचर करते हुए विशाखा नक्षत्र के चौथे पद में प्रवेश करता है, तो इस स्थिति को विशाखा बिछुड़ा या विदर बिछुड़ा (कुछ क्षेत्रों में इसे विंछुड़ो भी कहा जाता है) कहा जाता है।
विशाखा का अर्थ है विशाखा नक्षत्र
बिछुड़ा का अर्थ है वृश्चिक (बिच्छू) राशि
यानी यह वह समय है जब चंद्रमा वृश्चिक राशि से जुड़े नक्षत्रों के विशेष चरणों में गोचर करता है।
चंद्रमा की स्थिति और नक्षत्र
वृश्चिक राशि में चंद्रमा जब निम्न नक्षत्रों/पदों में गोचर करता है, तब यह स्थिति विशाखा बिछुड़ा या विंछुड़ो कहलाती है:
विशाखा नक्षत्र का चौथा पद
अनुराधा नक्षत्र के चारों पद
ज्येष्ठा नक्षत्र के चारों पद
वृश्चिक राशि में चंद्रमा का प्रभाव
वृश्चिक राशि मंगल ग्रह की राशि मानी जाती है, जिसे सेनापति का प्रतिनिधि कहा जाता है।
चंद्रमा को रानी के समान माना जाता है, और जब वह सेनापति (मंगल) की राशि में प्रवेश करता है, तो यह स्थिति सहज नहीं मानी जाती।
चंद्रमा मन का कारक ग्रह है, इसलिए इस दौरान मन में अस्थिरता, तनाव या बेचैनी महसूस हो सकती है।
विशाखा बिछुड़ा/विंछुड़ो के दौरान क्या न करें?
कोई भी नया कार्य या शुभ कार्य आरंभ करने से बचें।
विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे मांगलिक कार्यों की शुरुआत टालें।
महत्वपूर्ण निर्णय लेने या नई योजना शुरू करने से बचना उचित माना जाता है।
बड़े आर्थिक लेन-देन या नया निवेश करने से पहले सोच-विचार करें।
विशाखा बिछुड़ा/विंछुड़ो के दौरान क्या करें?
इस अवधि में पूजा-पाठ और आध्यात्मिक कार्यों पर ध्यान देना शुभ माना जाता है।
यह समय मन की शांति, ध्यान और साधना के लिए अनुकूल होता है।
पहले से चल रहे कार्यों को जारी रखा जा सकता है; केवल नई शुरुआत टालने की सलाह दी जाती है।
विशाखा बिछुड़ा/विंछुड़ो की अवधि कितनी होती है?
यह हर महीने आता है और लगभग 60 घंटे यानी ढाई दिन तक रहता है।
इस अवधि के दौरान सतर्क रहकर शुभ कार्यों को कुछ समय के लिए टाल देना बेहतर माना जाता है।
आने वाले महीनों में विशाखा बिछुड़ा/विंछुड़ो कब-कब है? (अक्टूबर – दिसंबर 2026)
अक्टूबर 2026 ----------13 अक्टूबर, मंगलवार, रात्रि 07:13 बजे 16 अक्टूबर, शुक्रवार, प्रातः 06:48 बजे
नवंबर 2026 -------------10 नवंबर, मंगलवार, प्रातः 02:48 बजे 12 नवंबर, बृहस्पतिवार, दोपहर 02:19 बजे
दिसंबर 2026 -----------7 दिसंबर, सोमवार, प्रातः 09:14 बजे 9 दिसंबर, बुधवार, रात्रि 09:01 बजे
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. सितंबर 2026 में विंछुड़ो/विशाखा बिछुड़ा कब शुरू और कब समाप्त होगा?
सितंबर 2026 में विंछुड़ो 16 सितंबर को प्रातः 10:49 बजे (बुधवार) शुरू होगा और 18 सितंबर को रात्रि 10:45 बजे (शुक्रवार) समाप्त होगा।
2. विंछुड़ो और विशाखा बिछुड़ा में क्या अंतर है?
मूल रूप से दोनों एक ही खगोलीय स्थिति को दर्शाते हैं — चंद्रमा का वृश्चिक राशि के विशेष नक्षत्र-पदों में गोचर। अलग-अलग क्षेत्रों में इसे विंछुड़ो, विदर बिछुड़ा या बिछुड़ा जैसे नामों से जाना जाता है।
3. क्या विंछुड़ो के दौरान यात्रा करना उचित है?
पारंपरिक मान्यता के अनुसार इस दौरान नई या महत्वपूर्ण यात्राएं शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है, हालांकि पहले से तय या आवश्यक यात्रा को टालना जरूरी नहीं माना जाता।
4. क्या विंछुड़ो के दौरान विवाह या मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं?
नहीं, इस अवधि को शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता, इसलिए विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक आयोजन इस समय के बाद रखने की सलाह दी जाती है।
5. विंछुड़ो हर महीने आता है या सिर्फ कुछ महीनों में?
यह हर महीने चंद्रमा के वृश्चिक राशि में गोचर के दौरान आता है और लगभग ढाई दिन (लगभग 60 घंटे) तक रहता है।
6. विंछुड़ो के दौरान क्या पूजा-पाठ किया जा सकता है?
हां, इस अवधि को आध्यात्मिक कार्यों, पूजा-पाठ और ध्यान-साधना के लिए अनुकूल माना जाता है।
7. विंछुड़ो की तिथि और समय क्षेत्र (शहर) के अनुसार बदलती है क्या?
हां, चंद्रमा के गोचर का सटीक समय भौगोलिक स्थान के अनुसार कुछ मिनटों तक भिन्न हो सकता है। ऊपर दिया गया समय सामान्य संदर्भ के लिए है।
नोट: यह जानकारी पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं और पंचांग गणना पर आधारित है, यह पूर्णतः वैज्ञानिक सत्य नहीं है। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले अपने विश्वसनीय ज्योतिषी से सलाह अवश्य लें।

