6 जुलाई 2026 का पंचांग: सोमवार का शुभ मुहूर्त, राहुकाल, तिथि, नक्षत्र, योग और सूर्योदय-सूर्यास्त समय
6 जुलाई 2026, सोमवार का पंचांग पढ़ें। जानें आषाढ़ कृष्ण षष्ठी तिथि, धनिष्ठा नक्षत्र, आयुष्मान योग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल, सूर्योदय-सूर्यास्त का समय और भगवान शिव की पूजा के शुभ उपाय।

6 जुलाई 2026 का पंचांग (सोमवार)
पंचांग विवरण
दिन: सोमवार
तिथि: आषाढ़ कृष्ण षष्ठी
पक्ष: कृष्ण पक्ष
मास: आषाढ़
विक्रम संवत: 2083
सूर्य राशि: मिथुन
चंद्र राशि: कुंभ
ऋतु: वर्षा ऋतु
सूर्योदय: प्रातः 05:33 बजे
सूर्यास्त: सायं 07:42 बजे
तिथि
आषाढ़ कृष्ण षष्ठी
षष्ठी तिथि भगवान कार्तिकेय और माता कात्यायनी की उपासना के लिए शुभ मानी जाती है। यह तिथि साहस, पराक्रम, स्वास्थ्य और शत्रुओं पर विजय का प्रतीक मानी जाती है। इस दिन पूजा-पाठ, व्रत और दान-पुण्य करने से विशेष शुभ फल प्राप्त होने की मान्यता है।
नक्षत्र
धनिष्ठा नक्षत्र
धनिष्ठा नक्षत्र समृद्धि, सफलता, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता है। इस नक्षत्र में किए गए कार्यों में उन्नति और सफलता मिलने की संभावना अधिक रहती है। व्यापार, शिक्षा और करियर से जुड़े कार्यों के लिए यह नक्षत्र शुभ माना जाता है।
योग
आयुष्मान योग
आयुष्मान योग को अत्यंत शुभ योगों में गिना जाता है। इस योग में किए गए कार्य दीर्घकालिक सफलता, स्वास्थ्य लाभ और समृद्धि प्रदान करने वाले माने जाते हैं। धार्मिक कार्यों और नए कार्यों की शुरुआत के लिए भी यह योग अनुकूल है।
करण
गर करण
वणिज करण
ये दोनों करण व्यापार, यात्रा, शिक्षा, निवेश और शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माने जाते हैं।
शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: 12:01 PM से 12:52 PM तक
विजय मुहूर्त: 02:44 PM से 03:40 PM तक
अमृत काल: 08:55 AM से 10:30 AM तक
अशुभ समय
राहुकाल: 07:30 AM से 09:00 AM तक
यमगण्ड काल: 10:30 AM से 12:00 PM तक
गुलिक काल: 01:30 PM से 03:00 PM तक
धार्मिक महत्व
सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस दिन शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करने से मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है। आयुष्मान योग और धनिष्ठा नक्षत्र के संयोग में भगवान शिव की आराधना, महामृत्युंजय मंत्र का जाप तथा दान-पुण्य करना विशेष फलदायी माना गया है।
सोमवार के उपाय
भगवान शिव का जलाभिषेक करें।
शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा और सफेद पुष्प अर्पित करें।
"ॐ नमः शिवाय" मंत्र का 108 बार जाप करें।
महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करें।
जरूरतमंद लोगों को दूध, चावल या सफेद वस्त्र का दान करें।

