21 October 2026 Panchang: 21 अक्टूबर का पंचांग, दशमी तिथि, धनिष्ठा नक्षत्र और शुभ मुहूर्त
21 October 2026 Panchang: जानें 21 अक्टूबर 2026, बुधवार का पंचांग, दशमी तिथि, धनिष्ठा नक्षत्र, गण्ड योग, सूर्योदय-सूर्यास्त, ब्रह्म मुहूर्त, अभिजीत मुहूर्त और राहुकाल का समय। साथ ही जानें विजयादशमी का धार्मिक महत्व।

21 अक्टूबर 2026 का पंचांग: दशमी तिथि, धनिष्ठा नक्षत्र और जानें शुभ मुहूर्त
21 October 2026 Panchang: 21 अक्टूबर 2026, बुधवार को आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि दोपहर लगभग 2:11 बजे तक रहेगी, इसके बाद एकादशी तिथि शुरू होगी। इस दिन धनिष्ठा नक्षत्र और गण्ड योग रहेगा। बंगाल सहित कुछ क्षेत्रों में इस दिन विजयादशमी मनाई जाएगी, जबकि उत्तर भारत के अधिकतर हिस्सों में दशहरा 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा।
21 अक्टूबर 2026 का पंचांग
दिन: बुधवार
मास: आश्विन
पक्ष: शुक्ल पक्ष
तिथि: दशमी, दोपहर लगभग 2:11 बजे तक; इसके बाद एकादशी
नक्षत्र: धनिष्ठा, शाम लगभग 7:47 बजे तक; इसके बाद शतभिषा
योग: गण्ड, 22 अक्टूबर की रात लगभग 12:32 बजे तक
करण: गर, दोपहर लगभग 2:11 बजे तक; इसके बाद वणिज
विक्रम संवत: 2083
शक संवत: 1948
चंद्र राशि: मकर
सूर्य राशि: तुला
सूर्योदय: सुबह 6:25 बजे
सूर्यास्त: शाम 5:45 बजे
चंद्रोदय: दोपहर लगभग 2:50
21 अक्टूबर 2026 के शुभ मुहूर्त
दिल्ली के समय के अनुसार बुधवार के प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार हैं:
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:44 बजे से 5:34 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:28 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 1:59 बजे से 2:44 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:23 बजे से 6:11 बजे तक
अमृत काल: सुबह लगभग 8:37 बजे से 10:20 बजे तक।
21 अक्टूबर 2026 को राहुकाल का समय
राहुकाल: दोपहर 12:05 बजे से 1:30 बजे तक
यमगण्ड: सुबह 7:50 बजे से 9:15 बजे तक
गुलिक काल: सुबह 10:40 बजे से दोपहर 12:05 बजे तक।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राहुकाल में नए शुभ कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। पूजा-पाठ और दैनिक धार्मिक कार्य अपनी परंपरा के अनुसार किए जा सकते हैं।
21 अक्टूबर को विजयादशमी का महत्व
भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में विजयादशमी मनाने की परंपरा अलग हो सकती है। उत्तर भारत के अधिकतर हिस्सों में दशहरा 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा, जबकि बंगाल में 21 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस दिन मां दुर्गा की पूजा, देवी को विदाई और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की जाती है।

