21 जुलाई 2026 का पंचांग: जानें शुभ मुहूर्त, राहुकाल, षष्ठी तिथि, सिद्ध योग और मंगलवार के उपाय
21 जुलाई 2026 पंचांग: जानें मंगलवार का पंचांग, श्रावण शुक्ल षष्ठी तिथि, पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र, सिद्ध योग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल, सूर्योदय, सूर्यास्त और भगवान शिव-हनुमान की पूजा का महत्व।

21 जुलाई 2026 का पंचांग (मंगलवार)
पंचांग विवरण
दिन: मंगलवार
तिथि: श्रावण शुक्ल षष्ठी
पक्ष: शुक्ल पक्ष
मास: श्रावण मास
विक्रम संवत: 2083
सूर्य राशि: कर्क
चंद्र राशि: कन्या
ऋतु: वर्षा ऋतु
सूर्योदय: प्रातः 05:40 बजे
सूर्यास्त: सायं 07:38 बजे
तिथि
श्रावण शुक्ल षष्ठी
षष्ठी तिथि भगवान कार्तिकेय और माता कात्यायनी की उपासना के लिए विशेष मानी जाती है। इस दिन पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठान, शिक्षा, साहस से जुड़े कार्य और नए कार्यों की शुरुआत शुभ मानी जाती है। श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना का भी विशेष महत्व रहता है।
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र सुख, समृद्धि, कला, रचनात्मकता और वैवाहिक जीवन का प्रतीक माना जाता है। इस नक्षत्र में शुभ कार्य, मांगलिक कार्यक्रम, व्यापार और नए कार्यों की शुरुआत करना लाभदायक माना जाता है।
योग
सिद्ध योग
सिद्ध योग अत्यंत शुभ योगों में से एक है। इस योग में किए गए कार्यों में सफलता मिलने की संभावना अधिक रहती है। शिक्षा, व्यापार, निवेश, धार्मिक अनुष्ठान और नई योजनाओं की शुरुआत के लिए यह योग अनुकूल माना जाता है।
करण
तैतिल करण
गर करण
ये दोनों करण व्यापार, यात्रा, शिक्षा, निवेश और सामान्य शुभ कार्यों के लिए उत्तम माने जाते हैं।
शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:03 बजे से 12:55 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:46 बजे से 03:42 बजे तक
अमृत काल: प्रातः 08:45 बजे से 10:20 बजे तक
अशुभ समय
राहुकाल: दोपहर 03:00 बजे से 04:30 बजे तक
यमगण्ड काल: प्रातः 09:00 बजे से 10:30 बजे तक
गुलिक काल: दोपहर 12:00 बजे से 01:30 बजे तक
धार्मिक महत्व
मंगलवार का दिन भगवान हनुमान और मंगल देव को समर्पित है। श्रावण मास में भगवान शिव की पूजा के साथ हनुमान जी की आराधना करने से साहस, आत्मबल और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा प्राप्त होती है। इस दिन हनुमान चालीसा का पाठ, सुंदरकांड का पाठ और शिवलिंग पर जलाभिषेक करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
मंगलवार के उपाय
भगवान शिव का जल और बेलपत्र से अभिषेक करें।
हनुमान जी को सिंदूर, चमेली का तेल और बूंदी के लड्डू अर्पित करें।
"ॐ नमः शिवाय" और "ॐ हनुमते नमः" मंत्र का 108 बार जाप करें।
लाल मसूर की दाल, गुड़ या लाल वस्त्र का दान करें।
बंदरों और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं।

