15 जुलाई 2026 का पंचांग: आषाढ़ अमावस्या, शुभ मुहूर्त, राहुकाल, योग, नक्षत्र और पूजा का महत्व
15 July 2026 Panchang: जानें 15 जुलाई 2026, बुधवार का पंचांग। पढ़ें आषाढ़ अमावस्या की तिथि, शुभ मुहूर्त, राहुकाल, यमगण्ड काल, गुलिक काल, नक्षत्र, योग, करण, सूर्योदय-सूर्यास्त का समय, पितृ तर्पण का महत्व, दान-पुण्य, भगवान शिव, विष्णु और गणेश पूजा की विधि तथा आज के शुभ उपाय।

15 जुलाई 2026 का पंचांग (बुधवार)
पंचांग विवरण
दिन: बुधवार
तिथि: आषाढ़ अमावस्या
पक्ष: कृष्ण पक्ष
मास: आषाढ़
विक्रम संवत: 2083
सूर्य राशि: मिथुन
चंद्र राशि: मिथुन
ऋतु: वर्षा ऋतु
सूर्योदय: प्रातः 05:37 बजे
सूर्यास्त: सायं 07:41 बजे
तिथि
आषाढ़ अमावस्या
आषाढ़ अमावस्या पितरों के तर्पण, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान, पितरों का तर्पण, भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा करने का विशेष महत्व है। अमावस्या पर किए गए दान और पुण्य कार्यों का कई गुना फल प्राप्त होने की मान्यता है।
नक्षत्र
कृत्तिका नक्षत्र (अधिकांश समय)
इसके बाद रोहिणी नक्षत्र का आरंभ होगा।
कृत्तिका नक्षत्र साहस, नेतृत्व और आत्मविश्वास का प्रतीक माना जाता है, जबकि रोहिणी नक्षत्र समृद्धि, सुख, वैभव और शुभ कार्यों के लिए अत्यंत अनुकूल माना जाता है।
योग
ध्रुव योग
ध्रुव योग स्थिरता, सफलता और दीर्घकालिक शुभ परिणाम देने वाला योग माना जाता है। इस योग में किए गए धार्मिक कार्य, शिक्षा, व्यापार और निवेश से जुड़े कार्यों में अच्छे परिणाम प्राप्त होने की संभावना रहती है।
करण
नाग करण
किंस्तुघ्न करण
ये करण धार्मिक अनुष्ठान, पितृ तर्पण, जप, तप और दान-पुण्य के लिए शुभ माने जाते हैं।
शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: 12:02 PM से 12:53 PM तक
विजय मुहूर्त: 02:45 PM से 03:41 PM तक
अमृत काल: 08:55 AM से 10:30 AM तक
अशुभ समय
राहुकाल: 12:00 PM से 01:30 PM तक
यमगण्ड काल: 07:30 AM से 09:00 AM तक
गुलिक काल: 10:30 AM से 12:00 PM तक
धार्मिक महत्व
बुधवार के दिन पड़ने वाली आषाढ़ अमावस्या का विशेष धार्मिक महत्व है। इस दिन पितरों का तर्पण, ब्राह्मणों को भोजन, गौ सेवा और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र तथा दक्षिणा का दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। भगवान शिव, भगवान विष्णु और भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
बुधवार के उपाय
प्रातः स्नान के बाद पितरों का तर्पण करें।
भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा करें।
भगवान गणेश को दूर्वा और मोदक अर्पित करें।
"ॐ गं गणपतये नमः" और "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें।
काले तिल, अन्न, वस्त्र या दक्षिणा का दान करें।
गाय, कौवे और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं।

