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12 October 2026 Panchang: शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन, जानें द्वितीया तिथि, स्वाती नक्षत्र, शुभ मुहूर्त और राहुकाल

12 October 2026 Panchang: 12 अक्टूबर 2026 सोमवार को शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन है। जानें द्वितीया तिथि, स्वाती नक्षत्र, अभिजीत मुहूर्त, राहुकाल, चंद्रमा की स्थिति और मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का महत्व।

12 October 2026 Panchang: शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन, जानें द्वितीया तिथि, स्वाती नक्षत्र, शुभ मुहूर्त और राहुकाल
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12 अक्टूबर 2026 का पंचांग: जानें तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और चंद्रोदय का समय

12 October 2026 Panchang: 12 अक्टूबर 2026, सोमवार को आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है। इस दिन स्वाति नक्षत्र और विष्कुम्भ योग का संयोग रहेगा। शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन होने के कारण मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का विशेष महत्व है। सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित होता है। यहां जानें दिल्ली के अनुसार आज का पंचांग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और पूजा का समय।

12 अक्टूबर 2026 का पंचांग

दिन: सोमवार

मास: आश्विन

पक्ष: शुक्ल पक्ष

तिथि: द्वितीया, रात 10:13 बजे तक; इसके बाद तृतीया

नक्षत्र: स्वाति, रात 11:52 बजे तक; इसके बाद विशाखा

योग: विष्कुम्भ, रात लगभग 8:32 बजे तक

करण: बालव

विक्रम संवत: 2083

शक संवत: 1948

चंद्र राशि: तुला

सूर्य राशि: कन्या

12 अक्टूबर 2026 को राहुकाल का समय

राहुकाल: सुबह 7:46 बजे से 9:13 बजे तक

यमगण्ड: सुबह 10:40 बजे से दोपहर 12:07 बजे तक

गुलिक काल: दोपहर 1:34 बजे से 3:01 बजे तक।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राहुकाल में नए शुभ कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, नियमित पूजा-पाठ और दैनिक धार्मिक कार्य किए जा सकते हैं।

शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा

12 अक्टूबर को शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन है। इस दिन मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि मां ब्रह्मचारिणी तप, त्याग, संयम और दृढ़ संकल्प की प्रतीक हैं। भक्त इस दिन पूजा-अर्चना करके जीवन में सुख, शांति और आत्मबल की कामना करते हैं।

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि

सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल की सफाई करें। मां ब्रह्मचारिणी की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं। मां को फूल, अक्षत, फल और मिठाई अर्पित करें। इसके बाद दुर्गा चालीसा या मां ब्रह्मचारिणी के मंत्र का जाप करें और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।

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