वैशाख पूर्णिमा 2026: कब है तिथि, शुभ मुहूर्त, स्नान-दान का समय, पूजा विधि और महत्व | बुद्ध पूर्णिमा 2026
वैशाख पूर्णिमा 2026 हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और शुभ पर्व है, जिसे बुद्ध पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है। यह दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु की पूजा और गौतम बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण से जुड़ा हुआ है। साल 2026 में वैशाख पूर्णिमा 1 मई को मनाई जाएगी, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में पवित्र नदियों जैसे गंगा या यमुना में स्नान करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। स्नान के बाद दान-पुण्य, जप-तप और भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है।

वैशाख पूर्णिमा 2026: कब है तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि
Vaishakh Purnima 2026 Date: हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि को बेहद शुभ माना जाता है, लेकिन वैशाख मास की पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है। इस दिन को बुद्ध पूर्णिमा भी कहा जाता है, क्योंकि इसी दिन भगवान गौतम बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण हुआ था। साल 2026 में वैशाख पूर्णिमा मई महीने की शुरुआत में पड़ रही है, जिसे लेकर भक्तों में खास उत्साह रहता है। यह तिथि भगवान भगवान विष्णु की आराधना के साथ-साथ भगवान बुद्ध के जन्म, ज्ञान और महापरिनिर्वाण से भी जुड़ी होने के कारण और भी महत्वपूर्ण बन जाती है। मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान कर जरूरतमंदों को दान करने से जीवन के पापों का नाश होता है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस साल वैशाख पूर्णिमा 1 मई को पड़ रही है। वहीं इस दिन सिद्धि योग भी बन रहा है, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है। आइए जानते हैं तिथि और दान- स्नान का शुभ मुहूर्त…
स्नान-दान का शुभ मुहूर्त
वैशाख पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:15 से 05:00 बजे तक
सूर्योदय स्नान का श्रेष्ठ समय: 05:35 से 07:30 बजे तक
इस दौरान गंगा, यमुना या किसी पवित्र नदी में स्नान कर दान करने से कई गुना फल प्राप्त होता है।
वैशाख पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
वैशाख पूर्णिमा को धर्म, दान और तप का महापर्व कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। वहीं इसी दिन भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण हुआ था, इसलिए इसे बुद्ध पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है। इस कारण यह दिन हिंदू और बौद्ध दोनों धर्मों में अत्यंत पवित्र माना जाता है।

