Raksha Bandhan 2026: 28 अगस्त को मनाया जाएगा रक्षाबंधन, जानें राखी बांधने का शुभ मुहूर्त, भद्रा काल और पूजा विधि
Raksha Bandhan 2026: इस साल रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। जानें राखी बांधने का शुभ मुहूर्त, भद्रा काल, पूर्णिमा तिथि और रक्षाबंधन की पूजा विधि।

Bhaum Pradosh Vrat 2026: 25 अगस्त को है भौम प्रदोष, मंगला गौरी व्रत का भी संयोग, जानें पूजा मुहूर्त और विधि
Bhaum Pradosh Vrat 2026: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। इस महीने आने वाला प्रदोष व्रत भी भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस बार सावन शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 25 अगस्त 2026, मंगलवार को पड़ रही है। मंगलवार के दिन पड़ने के कारण इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाएगा। खास बात यह है कि इसी दिन मंगला गौरी व्रत का भी संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस संयोग में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से वैवाहिक सुख, परिवार की खुशहाली और मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद मिल सकता है।
प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के आसपास करने की परंपरा है। पंचांग के अनुसार इस बार त्रयोदशी तिथि 25 अगस्त को सुबह 6:20 बजे से शुरू होकर 26 अगस्त को सुबह 7:59 बजे तक रहेगी।
कब है रक्षाबंधन (Kab Hai Rakshabandhan 2026)
पंचांग के मुताबिक साल 2026 में श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का आरंभ 27 अगस्त 2026 को दोपहर में होगा और इसका अंत 28 अगस्त 2026 को दोपहर में होगा। उदयातिथि के अनुसार, रक्षाबंधन का पावन पर्व 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। रक्षाबंधन की पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह 9 बजकर 7 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 28 अगस्त 2026 को सुबह 9 बजकर 49 मिनट पर होगा।
राखी बांधने का शुभ मुहूर्त ( Raksha Bandhan 2026 Shubh Muhurat)
पंचांग अनुसार 28 अगस्त को राखी बांधने का सबसे शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 57 मिनट से लेकर सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा।
रक्षाबंधन 2026 भद्रा काल (Raksha Bandhan 2026 Bhadra Kaal)
पंचांग अनुसार इस साल भद्रा काल की बात करें, तो 27 अगस्त को सुबह 9 बजकर 8 मिनट से रात 9 बजकर 32 मिनट तक भद्रा का प्रभाव रहेगा। लेकिन 28 अगस्त तो रक्षाबंधन भद्रा रहित होगा।
रक्षाबंधन 2026 पूजा-विधि
सबसे पहले सुबह स्नान करके साफ-सुथरे कपड़े पहनें और पूजा स्थान की सफाई करें।
पूजा की थाली में राखी, रोली, अक्षत, चंदन, दीपक, मिठाई और फल रखें।
भगवान गणेश और अपने इष्टदेव की पूजा करें।
भाई को पूजा के स्थान पर बैठाकर उसके माथे पर चंदन या रोली से तिलक लगाएं।
भाई के दाहिने हाथ में रक्षा सूत्र यानी राखी बांधें।
इसके बाद भाई की आरती उतारकर उसे मिठाई खिलाएं।
भाई अपनी बहन को उपहार देकर उसकी रक्षा और सुख-समृद्धि का संकल्प ले।
धार्मिक मान्यता के अनुसार राखी बांधते समय भद्रा काल से बचना चाहिए।
रक्षाबंधन पर इस बार कई संयोग एक साथ, राखी की डोर से लेकर आसमान तक बदला-बदला नजर आएगा
इस बार रक्षाबंधन सिर्फ भाई की कलाई पर राखी बांधने का त्योहार नहीं, बल्कि तिथि, भद्रा, पंचक और खगोलीय घटना को लेकर भी खास चर्चा में है। वर्ष 2026 में रक्षाबंधन 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। हालांकि पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त सुबह शुरू होकर 28 अगस्त सुबह तक रहने के कारण लोगों के बीच 27 या 28 अगस्त को लेकर भ्रम बना हुआ है। दिल्ली के लिए पंचांग के अनुसार पूर्णिमा 27 अगस्त सुबह 9:08 बजे शुरू होकर 28 अगस्त सुबह 9:48 बजे समाप्त होगी।
राखी की तारीख पर क्यों हुआ कन्फ्यूजन?
रक्षाबंधन श्रावण पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस बार पूर्णिमा दो तारीखों को स्पर्श कर रही है, इसलिए कैलेंडर में 27 और 28 अगस्त दोनों का उल्लेख दिखाई दे सकता है। दिल्ली के पंचांग के अनुसार रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त को मनाया जाएगा।
राखी बांधने के लिए दिल्ली में सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक का समय बताया गया है। पंचांग के अनुसार इस दिन भद्रा सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो चुकी होगी।
राखी के दिन चंद्रग्रहण भी!
इस रक्षाबंधन का सबसे दिलचस्प संयोग है कि 28 अगस्त को गहरा आंशिक चंद्रग्रहण भी होगा। खगोलीय गणना के मुताबिक ग्रहण का आंशिक चरण भारतीय समयानुसार सुबह करीब 8:04 बजे शुरू होकर लगभग 11:22 बजे तक रहेगा और इसका अधिकतम चरण करीब 9:43 बजे होगा।
लेकिन यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह चंद्रग्रहण भारत से दिखाई नहीं देगा। ग्रहण के दौरान भारत में चंद्रमा क्षितिज के नीचे रहेगा। इसलिए भारत में रहने वाले लोगों को आसमान में इस ग्रहण का दृश्य दिखाई नहीं देगा।
यानी एक तरफ भारत में भाई की कलाई पर राखी बांधी जा रही होगी और दूसरी तरफ दुनिया के कुछ हिस्सों में आसमान में चंद्रग्रहण की खगोलीय घटना घट रही होगी।
क्या भारत में लगेगा सूतक?
चंद्रग्रहण के साथ सबसे बड़ा सवाल सूतक को लेकर उठता है। धार्मिक परंपराओं में सूतक को ग्रहण से जुड़ी अवधि माना जाता है, लेकिन इसकी मान्यता और पालन की परंपरा अलग-अलग पंचांग एवं परंपराओं में भिन्न हो सकती है।
कुछ पंचांग-आधारित स्रोतों के अनुसार चूंकि 28 अगस्त का यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए भारत में सूतक मान्य नहीं माना जाएगा।
इसलिए इसे लेकर लोगों में अनावश्यक डर पैदा करने के बजाय स्थानीय पंचांग और अपनी पारिवारिक परंपरा को प्राथमिकता देना बेहतर होगा।
भद्रा के बाद ही राखी क्यों?
रक्षाबंधन पर भद्रा का नाम आते ही पुरानी मान्यता सामने आती है। धार्मिक परंपरा में भद्रा काल को शुभ कार्यों, विशेषकर राखी बांधने के लिए टालने की परंपरा रही है।
इस वर्ष राहत की बात यह है कि उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार भद्रा 27 अगस्त को ही समाप्त हो जाएगी और 28 अगस्त को राखी बांधने के समय भद्रा नहीं होगी।
यानी तारीख को लेकर भले ही भ्रम हो, लेकिन दिल्ली के लिए पंचांग में 28 अगस्त की सुबह राखी बांधने का स्पष्ट समय दिया गया है।
पंचक भी चर्चा में
इस बार रक्षाबंधन के आसपास पंचक को लेकर भी चर्चा है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर राखी के शुभ समय और धार्मिक नियमों को लेकर तरह-तरह की बातें सामने आ रही हैं। ऐसे में किसी वायरल पोस्ट को अंतिम सत्य मानने के बजाय स्थानीय पंचांग के अनुसार समय देखना अधिक उचित रहेगा।
राखी भी अब हो रही है 'न्यू जेनरेशन'
रक्षाबंधन की परंपरा पुरानी है, लेकिन राखी का बाजार तेजी से बदल रहा है। अब भाई की कलाई पर सिर्फ पारंपरिक मौली या डिजाइन वाली राखी ही नहीं, बल्कि personalised, handmade और पर्यावरण-अनुकूल राखियों का चलन भी बढ़ रहा है।
कॉफी बीन्स, क्रोशिया, इलायची-मौली और plantable जैसी अलग-अलग तरह की राखियां युवाओं के बीच आकर्षण का केंद्र बन रही हैं। यानी राखी अब सिर्फ धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि व्यक्तिगत पसंद और भावनाओं को व्यक्त करने का माध्यम भी बनती जा रही है।
तिलक में चावल क्यों लगाए जाते हैं?
रक्षाबंधन की रस्म में राखी से पहले भाई के माथे पर तिलक लगाने और उसके ऊपर चावल लगाने की परंपरा भी है। धार्मिक-सांस्कृतिक मान्यता में चावल को शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। यह रस्म बहन की भाई के सुख, स्वास्थ्य और मंगल की कामना को दर्शाती है।
राखी की असली कहानी ग्रहण से बड़ी
रक्षाबंधन की सबसे बड़ी खूबसूरती किसी ग्रहण, भद्रा या पंचक में नहीं, बल्कि उस रिश्ते में है जिसके लिए यह पर्व मनाया जाता है। समय बदल गया है—भाई-बहन अलग-अलग शहरों और देशों में रहते हैं, राखियां ऑनलाइन पहुंचती हैं और वीडियो कॉल पर भी तिलक-राखी की रस्में होती हैं।
लेकिन भावना वही है—“दूरियां चाहे जितनी हों, रिश्ते की डोर कमजोर नहीं होनी चाहिए।”
इस बार रक्षाबंधन इसलिए खास है क्योंकि एक ही तारीख पर त्योहार, पूर्णिमा, पंचांग की गणनाएं और एक बड़ी खगोलीय घटना चर्चा में हैं। मगर भारत में चंद्रग्रहण दिखाई नहीं देगा और उपलब्ध पंचांग के अनुसार 28 अगस्त की सुबह राखी बांधने का समय स्पष्ट है।
यानी इस साल की राखी में आसमान का रहस्य भी है, पंचांग का गणित भी और भाई-बहन के रिश्ते की वही पुरानी गर्माहट भी।
रक्षाबंधन 2026: FAQ
Q1. रक्षाबंधन 2026 कब मनाया जाएगा?
रक्षाबंधन 2026 में 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त सुबह शुरू होकर 28 अगस्त सुबह समाप्त होगी।
Q2. क्या 27 अगस्त या 28 अगस्त को राखी बांधनी है?
दिल्ली के पंचांग के अनुसार 28 अगस्त को रक्षाबंधन मनाया जाएगा। राखी बांधने का समय स्थानीय पंचांग के अनुसार देखना चाहिए।
Q3. क्या रक्षाबंधन के दिन चंद्रग्रहण लगेगा?
हां। 28 अगस्त 2026 को आंशिक चंद्रग्रहण होगा। हालांकि भारत से यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा।
Q4. क्या भारत में रक्षाबंधन पर चंद्रग्रहण दिखाई देगा?
नहीं। ग्रहण के दौरान भारत में चंद्रमा क्षितिज के नीचे रहेगा, इसलिए भारत से चंद्रग्रहण दिखाई नहीं देगा।
Q5. क्या रक्षाबंधन के दिन भारत में सूतक लगेगा?
कई पंचांग-आधारित गणनाओं के अनुसार, ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देने के कारण भारत में सूतक मान्य नहीं होगा। अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में मान्यता अलग हो सकती है।
Q6. क्या रक्षाबंधन पर भद्रा रहेगी?
उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार 28 अगस्त को राखी बांधने के समय भद्रा नहीं रहेगी।
Q7. रक्षाबंधन पर पंचक का क्या प्रभाव है?
पंचक को लेकर अलग-अलग पंचांगों में गणना मिल सकती है। इसलिए शुभ समय के लिए स्थानीय पंचांग को प्राथमिकता देना उचित है।
Q8. रक्षाबंधन पर राखी बांधने का शुभ समय क्या है?
दिल्ली के लिए उपलब्ध पंचांग के अनुसार 28 अगस्त की सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का समय बताया गया है।
Q9. क्या चंद्रग्रहण के कारण राखी बांधना अशुभ होगा?
भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण इसे लेकर डरने की जरूरत नहीं है। धार्मिक नियमों का पालन करने वाले लोग अपने स्थानीय पंचांग और पारिवारिक परंपरा के अनुसार निर्णय ले सकते हैं।
Q10. रक्षाबंधन पर तिलक में चावल क्यों लगाया जाता है?
भारतीय परंपरा में चावल को शुभता, समृद्धि और मंगलकामना का प्रतीक माना जाता है। तिलक के साथ चावल लगाना भाई के सुख और मंगल की कामना से जुड़ी रस्म है।
Q11. क्या इस बार राखियों में कोई नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है?
हां। पारंपरिक राखियों के साथ personalised, handmade, crochet, plantable और यहां तक कि coffee-bean जैसी अनोखी राखियां भी आकर्षण का केंद्र बन रही हैं।
Q12. क्या रक्षाबंधन सिर्फ भाई की कलाई पर राखी बांधने का त्योहार है?
परंपरागत रूप से यह भाई-बहन के प्रेम और सुरक्षा के संकल्प का पर्व है। आज इसके मायने और व्यापक हो गए हैं—बहन और भाई दोनों एक-दूसरे के प्रति प्यार, सम्मान और जिम्मेदारी व्यक्त करते हैं।

