Matra Navami 2026: कब है मातृ नवमी? जानें श्राद्ध की सही तिथि, मुहूर्त और धार्मिक महत्व
Matra Navami 2026: मातृ नवमी 6 अक्टूबर 2026, रविवार को मनाई जाएगी। जानें नवमी श्राद्ध की सही तिथि, कुतुप मुहूर्त, रौहिण मुहूर्त, श्राद्ध विधि, किन महिलाओं का श्राद्ध किया जाता है और मातृ नवमी का धार्मिक महत्व।

Matra Navami 2026: कब है मातृ नवमी? जानें श्राद्ध की सही तिथि, मुहूर्त और धार्मिक महत्व
Matra Navami 2026: पितृ पक्ष में हर तिथि का अपना धार्मिक महत्व माना जाता है। इसी क्रम में आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को मातृ नवमी के नाम से जाना जाता है। इस दिन विशेष रूप से दिवंगत माताओं, सुहागिन महिलाओं और मातृ पक्ष की अन्य दिवंगत महिलाओं के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, मातृ नवमी पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। इसे नवमी श्राद्ध, नौमी श्राद्ध और अविधवा श्राद्ध के नाम से भी जाना जाता है।
मातृ नवमी 2026 कब है?
साल 2026 में मातृ नवमी 4 अक्टूबर, रविवार को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार आश्विन कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि ६ अक्टूबर 2026 को सुबह 5:51 बजे शुरू होगी और 5 अक्टूबर को सुबह 3:53 बजे समाप्त होगी। इसलिए नवमी श्राद्ध 4 अक्टूबर को किया जाएगा।
मातृ नवमी 2026 की मुख्य जानकारी
मातृ नवमी:6 अक्टूबर 2026, रविवार
पक्ष: आश्विन कृष्ण पक्ष
तिथि: नवमी
नवमी तिथि शुरू: 6 अक्टूबर, सुबह 5:51 बजे
नवमी तिथि समाप्त: 7 अक्टूबर, सुबह 3:53 बजे
मुख्य कर्म: श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान
मातृ नवमी 2026 श्राद्ध का शुभ मुहूर्त
श्राद्ध कर्म के लिए दिन के विशेष मुहूर्त को महत्वपूर्ण माना जाता है। 4 अक्टूबर को मातृ नवमी के लिए ये समय बताए गए हैं:
कुतुप मुहूर्त: सुबह 12:20 बजे से दोपहर 1:13 बजे तक
रौहिण मुहूर्त: दोपहर 1:13 बजे से 2:06 बजे तक
अपराह्न काल: दोपहर 2:06 बजे से शाम 4:45 बजे तक
पंचांग के अनुसार स्थान बदलने पर इन समयों में थोड़ा अंतर हो सकता है। द्रिक पंचांग में नई दिल्ली के लिए कुतुप मुहूर्त 11:46 AM–12:33 PM, रौहिण मुहूर्त 12:33–1:20 PM और अपराह्न काल 1:20–3:42 PM दिया गया है। इसलिए श्राद्ध के लिए स्थानीय शहर के पंचांग के समय को प्राथमिकता देना उचित है।
मातृ नवमी के दिन किनका श्राद्ध किया जाता है?
मातृ नवमी का संबंध विशेष रूप से दिवंगत महिलाओं के श्राद्ध से माना जाता है। इस दिन धार्मिक परंपरा के अनुसार इनका श्राद्ध किया जा सकता है:
दिवंगत माता
मातृ पक्ष की दिवंगत महिलाएं
सुहागिन अवस्था में दिवंगत महिलाएं
ऐसी महिला जिनकी मृत्यु नवमी तिथि को हुई हो
परिवार की अन्य दिवंगत महिला पूर्वज, परंपरा के अनुसार
द्रिक पंचांग के अनुसार नवमी श्राद्ध उन पूर्वजों के लिए भी किया जाता है जिनकी मृत्यु शुक्ल या कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को हुई हो।
मातृ नवमी को क्यों माना जाता है खास?
हिंदू धार्मिक परंपरा में माता और मातृ पक्ष के पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का विशेष महत्व बताया गया है। इसी भावना से पितृ पक्ष की नवमी तिथि पर मातृ नवमी का श्राद्ध किया जाता है।
मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। इसे मातृ ऋण के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी माना जाता है। ये धार्मिक मान्यताएं हैं, जिनका पालन अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में अलग तरीके से किया जाता है।
मातृ नवमी पर कैसे करें श्राद्ध?
श्राद्ध की विधि परिवार और परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है। सामान्य रूप से पितरों का स्मरण करके तर्पण और पिंडदान किया जाता है। इसके बाद ब्राह्मण भोजन, जरूरतमंदों को भोजन या दान देने की परंपरा भी कई परिवारों में है।
श्राद्ध कर्म करते समय साफ-सफाई, श्रद्धा और संयम का ध्यान रखा जाता है। यदि परिवार में श्राद्ध की पारंपरिक विधि निश्चित है तो उसी के अनुसार कर्म करना उचित माना जाता है।

