Masik Shivratri 2026: भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए करें इन शक्तिशाली शिव मंत्रों का जाप
Masik Shivratri 2026: मासिक शिवरात्रि के दिन भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए पंचाक्षरी मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र और शिव गायत्री मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। जानें शिव के शक्तिशाली मंत्र, उनका महत्व और जप करने की विधि।

मासिक शिवरात्रि 2026: भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए करें इन शक्तिशाली मंत्रों का जाप
मासिक शिवरात्रि का दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने और विशेष मंत्रों का जाप करने से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मासिक शिवरात्रि पर शिवलिंग का जलाभिषेक करने के बाद इन मंत्रों का जप करना विशेष फलदायी माना जाता है। हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को यह व्रत रखा जाता है और भक्त पूरे श्रद्धा भाव से भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करते हैं। चैत्र मास की मासिक शिवरात्रि का भी विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन शिव मंत्रों का जाप करने और विधि-विधान से पूजा करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त हो सकती है। मान्यता है कि सच्चे मन से किए गए मंत्र जप से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग खुलता है। तो आइए जानते हैं इन मंत्रों के बारे में
भगवान शिव के शक्तिशाली मंत्र
पंचाक्षरी मंत्र
ॐ नमः शिवाय
यह भगवान शिव का सबसे प्रसिद्ध और शक्तिशाली मंत्र माना जाता है। इस मंत्र का जप करने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
महामृत्युंजय मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
इस मंत्र का जप करने से रोग, भय और नकारात्मकता दूर होने की मान्यता है।
शिव गायत्री मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे
महादेवाय धीमहि
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
यह मंत्र बुद्धि और आत्मिक शक्ति को बढ़ाने वाला माना जाता है।
रुद्र मंत्र
ॐ नमो भगवते रुद्राय
इस मंत्र का जाप करने से जीवन की बाधाएं दूर होने और शिव कृपा मिलने की मान्यता है।
शिव नामावली मंत्र
।। श्री शिवाय नम:।।
।। श्री शंकराय नम:।।
।। श्री महेश्वराय नम:।।
।। श्री सांबसदाशिवाय नम:।।
।। श्री रुद्राय नम:।।
।। ओम पार्वतीपतये नम:।।
।। ओम नमो नीलकण्ठाय नम
शिव प्रार्थना मंत्र
करचरणकृतं वाक् कायजं कर्मजं श्रावण वाणंजं वा मानसंवापराधं । विहितं विहितं वा सर्व मेतत् क्षमस्व जय जय करुणाब्धे श्री महादेव शम्भो॥
शिव गायत्री मंत्र
ऊँ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि, तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्।
शिव आरोग्य मंत्र
माम् भयात् सवतो रक्ष श्रियम् सर्वदा। आरोग्य देही में देव देव, देव नमोस्तुते।। ओम त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्

