Rashifal Today

गुरु प्रदोष व्रत कथा 2026: पढ़ें पावन कथा, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और महत्व

गुरु प्रदोष व्रत कथा 2026 पढ़ें। जानें गुरु प्रदोष व्रत की तिथि, पूजा विधि, धार्मिक महत्व, शिव पूजा का शुभ समय और व्रत से मिलने वाले लाभ।

गुरु प्रदोष व्रत कथा 2026: पढ़ें पावन कथा, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और महत्व
X

गुरु प्रदोष व्रत कथा: पढ़ें पावन कथा, पूजा विधि और महत्व

Guru Pradosh Vrat Katha: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान भगवान शिव को समर्पित अत्यंत शुभ व्रत माना जाता है। जब यह व्रत गुरुवार के दिन पड़ता है, तो इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियम से व्रत करने पर भगवान शिव और देवगुरु बृहस्पति की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

गुरु प्रदोष व्रत 2026 कब है?

पंचांग के अनुसार मई 2026 का गुरु प्रदोष व्रत 14 मई 2026, गुरुवार को रखा जाएगा।

प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है।

गुरु प्रदोष व्रत का महत्व

भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त होती है

जीवन की बाधाएं और कष्ट दूर होने की मान्यता है

धन, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति मिल सकती है

गुरु ग्रह मजबूत होने से शिक्षा और करियर में लाभ मिल सकता है

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष काल में की गई शिव पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।

गुरु प्रदोष व्रत कथा

प्राचीन समय की बात है। एक नगर में एक गरीब ब्राह्मण अपनी पत्नी और पुत्र के साथ रहता था। परिवार आर्थिक कठिनाइयों से परेशान था।

एक दिन ब्राह्मण की पत्नी ने किसी संत से गुरु प्रदोष व्रत का महत्व सुना। संत ने बताया कि जो व्यक्ति श्रद्धा और नियम से यह व्रत करता है, उसके जीवन के दुख दूर होते हैं और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।

इसके बाद ब्राह्मण परिवार ने गुरु प्रदोष व्रत रखना शुरू किया। वे प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करते, दीपक जलाते और व्रत कथा सुनते थे।

कुछ समय बाद भगवान शिव की कृपा से उनके घर की गरीबी दूर होने लगी। परिवार में सुख-समृद्धि और शांति आने लगी।

तभी से यह मान्यता प्रचलित हुई कि श्रद्धा और भक्ति से किया गया गुरु प्रदोष व्रत जीवन के कष्ट दूर कर सुख-समृद्धि प्रदान करता है।

गुरु प्रदोष व्रत पूजा विधि

सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें

पूरे दिन सात्विकता का पालन करें

शाम को प्रदोष काल में शिवलिंग की पूजा करें

भगवान शिव को जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करें

“ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें

प्रदोष व्रत कथा सुनें और आरती करें

प्रदोष काल में दीपदान करना भी शुभ माना जाता है।

Tags:
Next Story