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फाल्गुन अमावस्या 2026: तिथि, धार्मिक महत्व, पितृ तर्पण के नियम, धन-समृद्धि और खुशहाली पाने के असरदार उपाय

फाल्गुन अमावस्या 2026 कब है, इसका धार्मिक महत्व क्या है और इस दिन पितृ तर्पण, पूजा-पाठ और दान करने के सही उपाय क्या हैं — जानें इस विस्तृत लेख में। हिंदू धर्म में फाल्गुन अमावस्या को पितरों की कृपा, मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और नकारात्मक ऊर्जा दूर करने के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन किए गए उपाय, जैसे पीपल पूजा, लक्ष्मी पूजन, मंत्र जाप और दान-पुण्य, जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। यहां जानें फाल्गुन अमावस्या 5 मार्च 2026 की तिथि, पूजा विधि, पितृ दोष निवारण के उपाय और शुभ फल पाने के आसान धार्मिक उपाय

फाल्गुन अमावस्या 2026: तिथि, धार्मिक महत्व, पितृ तर्पण के नियम, धन-समृद्धि और खुशहाली पाने के असरदार उपाय
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फाल्गुन अमावस्या 2026: खुशहाली, समृद्धि और पूर्वजों की कृपा पाने के संपूर्ण उपाय

Falgun Amavasya 2026 Upay in Hindi: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना जाता है क्योंकि यह पूर्वजों की पितृ कृपा, दुख नाश, मानसिक शांति और समृद्धि से जुड़ी होती है। फाल्गुन अमावस्या चार मास की अमावस्या में से एक महत्वपूर्ण अमावस्या मानी जाती है। इस दिन किये गए उपायों को पुण्यदायी माना जाता है, जिससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है और बाधाएं कम होती हैं।

इस लेख में जानिए — फाल्गुन अमावस्या 2026 की तिथि, महत्व और शुभ परिणाम पाने के प्रभावी उपाय।

फाल्गुन अमावस्या 2026 कब है?

वर्ष 2026 में फाल्गुन अमावस्या 5 मार्च 2026 को है। इस दिन पितृ तर्पण और पूजा-पाठ विशेष फलदायी माना गया है।

धार्मिक मान्यता है कि यदि श्रद्धा से पितृ तर्पण किया जाए, तो पूर्वजों की कृपा बनी रहती है और जीवन में सुख-शांति आती है।

फाल्गुन अमावस्या का धार्मिक महत्व

धार्मिक शास्त्रों में अमावस्या को अंधकार की समाप्ति और प्रकाश की ओर उन्नति का संकेत माना गया है। यह वह दिन है जब पितरों की आत्मा पृथ्वी के निकट मानी जाती है, इसलिए पितृ पूजन और तर्पण का विशेष महत्व बनता है।

विशेष रूप से फाल्गुन मास की अमावस्या को सुख-समृद्धि, संतुलित मनोबल और पूर्वजों के आशीर्वाद का समय बताया गया है।

पीपल की पूजा से मिलेगा देव और पितरों का आशीर्वाद

हिंदू मान्यता के अनुसार पीपल के वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है। इसे पितरों का प्रतीक भी माना गया है। कहा जाता है कि अमावस्या के दिन पीपल की जड़ में जल चढ़ाकर सरसों के तेल का दीपक जलाने से पितरों के साथ देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन सुबह या शाम पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं और अपनी मनोकामना बोलकर प्रार्थना करें। मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और घर में सुख-शांति बनी रहती है।

पितरों के तर्पण से दूर होगा पितृ दोष

अगर किसी की कुंडली में पितृ दोष है या परिवार में बार-बार बाधाएं आ रही हैं, तो फाल्गुन अमावस्या का दिन विशेष उपाय के लिए उत्तम माना जाता है। इस दिन दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों के लिए श्रद्धा भाव से तर्पण करना चाहिए। साथ ही पितृसूक्त या पितरों के मंत्रों का पाठ करना शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से किया गया तर्पण पितरों को तृप्त करता है और उनका आशीर्वाद परिवार पर बना रहता है।

माता लक्ष्मी की पूजा से दूर होंगी आर्थिक दिक्कतें

अमावस्या तिथि को धन की देवी मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने का भी विशेष दिन माना गया है। इस दिन घर की साफ-सफाई कर मुख्य द्वार पर दीपक जलाना चाहिए। घर के किसी भी कोने में अंधेरा न रहने दें। शाम के समय माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करें और उनके मंत्रों का जप करें। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है और आर्थिक संकट धीरे-धीरे समाप्त होते हैं।

फाल्गुन अमावस्या के जप और मंत्र

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन निम्न मंत्र का जाप लाभप्रद माना जाता है:

ॐ पितृदेवते नमः

इस मंत्र का जाप गरीबों को अन्न, वस्त्र या तेल का दान देते समय करें — इससे पितृआशीर्वाद और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

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