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करीद 2026 कब है? जानें ईद-उल-अजहा की तारीख, इतिहास और महत्व

Bakrid 2026 Date: जानें बकरीद 2026 कब मनाई जाएगी, ईद-उल-अजहा का इतिहास, कुर्बानी का धार्मिक महत्व और इस पर्व से जुड़ी खास बातें।

करीद 2026 कब है? जानें ईद-उल-अजहा की तारीख, इतिहास और महत्व
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बकरीद 2026 कब है? जानें तारीख, इतिहास और ईद-उल-अजहा का महत्व

Bakrid 2026 / Eid al-Adha 2026: इस्लाम धर्म में बकरीद, जिसे ईद-उल-अजहा या कुर्बानी की ईद भी कहा जाता है, सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक मानी जाती है। यह पर्व त्याग, बलिदान और अल्लाह के प्रति समर्पण का प्रतीक माना जाता है। ये उत्सव पैगंबर इब्राहिम द्वारा किए जाने वाले सर्वोच्च बलिदान को याद करके मनाया जाता है। अल्लाह के प्रति समर्पण के रूप में इस दिन कुर्बानी दी जाती है। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, बकरीद का त्योहार हर वर्ष जुलहिज्जा (12वां महीना) की दसवीं तारीख को मनाया जाता है। इस दिन जानवर की कुर्बानी देने के साथ इसे तीन भागों में बांटा जाता है। आइए जानते हैं इस साल बकरीद कब पड़ रही है। इसके साथ ही जानें इस दिन कुर्बानी देने के पीछे क्या है धार्मिक कारण…

कब है बकरीद 2026? (Bakrid 2026 Date)

दिल्ली की ऐतिहासिक फतेहपुरी मस्जिद के मौजूदा शाही इमाम मुफ्ती मुकर्रम अहमद (Dr. Mufti Mohd. Mukarram Ahmed) एक प्रसिद्ध इस्लामिक विद्वान, लेखक और खतीब हैं। उनके अनुसार, इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक 12वें महीने जु अल-हज्जा की 10वीं तारीख को ईद उल-अज़हा का पर्व मनाया जाता है। इस साल ज़ु अल-हज्जा महीना 30 दिन का है। इसलिए इस साल बकरीद 27 या फिर 28 मई को मनाई जा सकती है। हालांकि अंतिम पुष्टि स्थानीय चांद देखने पर निर्भर करती है।

बकरीद का इतिहास

इस्लामी मान्यताओं के अनुसार, हजरत इब्राहिम अल्लाह के सच्चे भक्त थे।

कहा जाता है कि अल्लाह ने उनकी परीक्षा लेने के लिए उनसे उनकी सबसे प्रिय चीज कुर्बान करने को कहा। हजरत इब्राहिम अपने बेटे की कुर्बानी देने के लिए तैयार हो गए। उनकी श्रद्धा और समर्पण देखकर अल्लाह ने उनके बेटे की जगह एक जानवर भेज दिया।

तभी से बकरीद पर कुर्बानी देने की परंपरा मानी जाती है।

तीन भागों में बांटा जाता है कुर्बान किया हुआ बकरा

बता दें कि बकरीद के दिन जिस बकरे की कुर्बानी दी जाती है। उसे तीन भागों में बांटा जाता है। इसमें से पहला भाग स्वयं के लिए, दूसरा हिस्सा अपने किसी दोस्त या फिर करीबी के लिए तीसरा हिस्सा किसी गरीब या फिर जरूरतमंद को दिया जाता है।

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