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अधिक मास 2026: जानें भगवान विष्णु पूजा विधि, मंत्र, चालीसा, आरती और पुरुषोत्तम मास के नियम

Adhik Maas 2026: जानें पुरुषोत्तम मास 2026 कब है, भगवान विष्णु की पूजा विधि, मंत्र, आरती, चालीसा और अधिक मास के नियम व धार्मिक महत्व।

अधिक मास 2026: जानें भगवान विष्णु पूजा विधि, मंत्र, चालीसा, आरती और पुरुषोत्तम मास के नियम
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अधिक मास 2026: जानें भगवान विष्णु पूजा विधि, मंत्र, चालीसा, आरती और पुरुषोत्तम मास के नियम

Adhik Maas 2026: हिंदू पंचांग में अधिक मास को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है और यह माह भगवान भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिक मास में पूजा-पाठ, जप, दान और व्रत करने से कई गुना पुण्य फल प्राप्त हो सकता है। साल 2026 में आने वाला अधिक मास भक्तों के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है। बता दें कि अधिक मास करीब 3 साल बाद आता है, जब वर्ष में 12 नहीं बल्कि 13 महीने होते हैं। आमतौर पर हर माह के 30 दिन सौर कैलेंडर के हिसाब से होते हैं। लेकिन चंद्र कैलेंडर की गणना के मुताबिक, एक साल में 365 दिन और 6 घंटे होता है। लेकिन चंद्रमा का एक वर्ष 354 दिनों का होता है। ऐसे में हर साल 11 दिन का अंतर होता है। इसी के कारण 3 साल बाद ये अलग से एक पूरा माह हो जाता है, जो अधिक मास यानी पुरुषोत्तम मास कहलाता हैल पुरुषोत्तम मास में भगवान विष्णु का पूजा करने के लिए सबसे सही षोडशोपचार पूजन माना जाता है, जो 16 क्रियाओं से परिपूर्ण मंत्रों के साथ होता है। इसकी शुरुआत ध्यान-प्रार्थना से होती हैं। इसके बाद आसन, पाद्य,अर्ध्य, आचमन,.स्नान, वस्त्र, यज्ञोपवीत, गंधाक्षत, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, दक्षिणा, जल आरती, मंत्र पुष्पांजलि और अंत में प्रदक्षिणा-नमस्कार एवं स्तुति होती है।

अधिक मास में ऐसे करें श्री विष्णु की पूजा

पुरुषोत्तम मास में भगवान विष्णु का पूजा करने के लिए सबसे सही षोडशोपचार पूजन माना जाता है, जो 16 क्रियाओं से परिपूर्ण मंत्रों के साथ होता है। इसकी शुरुआत ध्यान-प्रार्थना से होती हैं। इसके बाद आसन, पाद्य,अर्ध्य, आचमन,.स्नान, वस्त्र, यज्ञोपवीत, गंधाक्षत, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, दक्षिणा, जल आरती, मंत्र पुष्पांजलि और अंत में प्रदक्षिणा-नमस्कार एवं स्तुति होती है।

नियमित रूप से सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करके साफ वस्त्र धारण कर लें। अब सबसे पहले सूर्यदेव को अर्घ्य दें। इसके लिए एक तांबे के लोटे में जल, थोड़ा दूध, सिंदूर, अक्षत और लाल फूल डाल लें। अर्घ्य के बाद पूजा आरंभ करें। सबसे पहले विष्णु जी का पंचामृत, गंगाजल आदि से स्नान कराएं और साफ वस्त्र, आभूषण पहनाएं। इसके बाद फूल, माला और पीला चंदन लगाएं। फिर केसर युक्त खीर, मौसमी फल सहित अन्य भोग चढ़ाएं। फिर जल से आचमन करने के बाद घी का दीपक और धूप जलाकर श्री विष्णु जी के मंत्र, चालीसा और अंत में आरती कर लें।

अधिक मास में विष्णु मंत्र

मुख्य मंत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥

विष्णु गायत्री मंत्र

ॐ नारायणाय विद्महे

वासुदेवाय धीमहि

तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥

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