वैशाख कालाष्टमी 2026: सही तारीख, पूजा मुहूर्त, काल भैरव पूजा विधि, व्रत नियम और महत्व
Vaishakh Kalashtami 2026 Date & Puja Muhurat: जानें वैशाख कालाष्टमी 2026 कब है, व्रत की सही तारीख, निशिता काल पूजा मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र और इस व्रत का धार्मिक महत्व। कालाष्टमी भगवान काल भैरव को समर्पित एक विशेष तिथि है, जिसे संकट, भय, शत्रु बाधा और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति पाने के लिए अत्यंत प्रभावी माना जाता है। इस दिन रात्रि में पूजा करने का विशेष महत्व होता है। पढ़ें काल भैरव पूजा के आसान नियम, भोग, उपाय और व्रत से मिलने वाले लाभ।

वैशाख कालाष्टमी 2026: सही तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व
Vaishakh Kalashtami 2026 Date, Muhurat, Puja Vidhi: हिंदू धर्म में कालाष्टमी भगवान काल भैरव को समर्पित एक विशेष तिथि मानी जाती है। हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी को कालाष्टमी मनाई जाती है, लेकिन वैशाख महीने की कालाष्टमी का महत्व और भी अधिक होता है। इस दिन भक्त पूरे श्रद्धा भाव से व्रत रखकर भगवान भैरव की आराधना करते हैं, जिससे जीवन के कष्ट दूर होते हैं और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है। आइए जानते हैं कब वैशाख कालाष्टमी व्रत और पूजा का सुभ मुहूर्त
कालाष्टमी 2026 की सही तिथि (Vaishakh Kalashtami Vrat)
फ्यूचर पंचांग के मुताबिक वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 9 अप्रैल 2026 को रात 09 बजकर 18 मिनट पर आरंभ हो रही है और 10 अप्रैल 2026 को रात 11 बजकर 14 मिनट पर खत्म होगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार कालाष्टमी की पूजा निशा काल में की जाती है। इसलिए इस बार कालाष्टमी का व्रत 9 अप्रैल 2026 को रखा जाएगा।
शुभ मुहूर्त (Puja Muhurat)
निशिता काल (रात्रि पूजा का समय): रात 12:00 बजे के आसपास
शाम का समय (सूर्यास्त के बाद) भी पूजा के लिए शुभ माना जाता है
काल भैरव की पूजा खासतौर पर रात्रि में करना अधिक फलदायी होता है।
कालाष्टमी व्रत की पूजा- विधि
कालाष्टमी व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करके साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें और भगवान काल भैरव का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें। इसके बाद घर के मंदिर या पूजा स्थल को साफ करके वहां काल भैरव की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। पूजा के दौरान सरसों का तेल, काले तिल, उड़द दाल, नीले या काले फूल, नारियल और मिठाई अर्पित करें। सरसों के तेल का दीपक जलाकर भगवान भैरव को तेल चढ़ाना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इसके बाद “ॐ कालभैरवाय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें और विधिपूर्वक आरती करें। पूजा के अंत में भगवान को भोग लगाकर प्रसाद बांटें और विशेष रूप से काले कुत्ते को रोटी या भोजन अवश्य खिलाएं, क्योंकि इसे भैरव बाबा का वाहन माना जाता है।
कालाष्टमी व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान काल भैरव को भगवान शिव का उग्र रूप माना जाता है, जो समय और मृत्यु के देवता हैं। कालाष्टमी के दिन उनकी पूजा करने से भय, रोग, शत्रु बाधा और ग्रह दोषों से मुक्ति मिलती है। विशेष रूप से जो लोग शनि, राहु या केतु के दुष्प्रभाव से परेशान होते हैं, उनके लिए यह व्रत बेहद लाभकारी माना गया है। इस दिन कुत्तों को भोजन कराना भी शुभ माना जाता है, क्योंकि उन्हें काल भैरव का वाहन माना जाता है।

