दशा माता व्रत 2026: जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र और आरती
Dasha Mata Vrat 2026 Date and Puja Vidhi: हिंदू धर्म में दशा माता व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत माता पार्वती के दशा माता स्वरूप को समर्पित होता है और मान्यता है कि इसे करने से जीवन की खराब दशा सुधरती है तथा घर में सुख-समृद्धि और शांति आती है। साल 2026 में दशा माता व्रत 13 मार्च, शुक्रवार को रखा जाएगा। इस दिन महिलाएं व्रत रखकर दशा माता की पूजा करती हैं और पीपल के पेड़ पर कच्चे सूत में 10 गांठ बांधकर पूजा करती हैं। जानें दशा माता व्रत 2026 की सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त, व्रत की पूजा विधि, मंत्र और आरती का महत्व।

दशा माता व्रत 2026: जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व
Dasha Mata Vrat 2026: हिंदू धर्म में दशा माता व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत माता पार्वती के दशा माता स्वरूप को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस व्रत को रखने से जीवन की खराब दशा सुधरती है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन सुहागिन महिलाएं दशा माता की पूजा करने के साथ कच्चे सूत में 10 गांठ बांधकर पीपल को बांधती हैं। ये व्रत मुख्य रूप से राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र आदि राज्यों में मनाया जाता है। दशा माता व्रत रखने से घर में सुख-शांति बनी रहती हैं और घर की खराब दशा सही हो जाती है। इसके साथ ही अनिष्ठ ग्रह भी शांत हो जाते हैं। इस साल दशमी तिथि दो दिन होने के कारण दशा माता व्रत की तिथि को लेकर असमंसज की स्थिति बनी हुई है। जानें दशा माता व्रत की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र और आरती…
दशा माता व्रत 2026 कब है (Dasha Mata Vrat 2026 Date And Time)
पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि 13 मार्च 2026 की सुबह 6 बजकर 28 मिनट से आरंभ होगा, जो 14 मार्च 2026 की सुबह 8 बजकर 10 मिनट पर समाप्त होगा। ऐसे में दशा माता का व्रत 13 मार्च, दिन शुक्रवार को रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार, दशा माता व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त 13 मार्च को सुबह 06:53 बजे से 11:19 बजे तक रहेगा। इसके बाद दोपहर में 12:47 बजे से 02:16 बजे तक शुभ मुहूर्त रहेगा।
दशा माता व्रत की पूजा विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
घर की साफ-सफाई करके पूजा स्थान तैयार करें।
दीवार या चौकी पर स्वास्तिक बनाकर दशा माता का चित्र या प्रतीक स्थापित करें।
दीपक जलाकर फूल, रोली, चावल और प्रसाद अर्पित करें।
दशा माता की कथा पढ़ें और आरती करें।
पूजा के बाद हाथ में पवित्र डोरा (धागा) बांधा जाता है।
व्रत से जुड़े कुछ नियम
इस दिन व्रती महिलाएं उपवास रखती हैं।
पूजा के बाद दशा माता का डोरा बांधा जाता है।
मान्यता है कि एक बार यह व्रत शुरू करने के बाद इसे हर साल करना चाहिए।
दशा माता व्रत मंत्र (Dasha Mata Vrat Mantra)
मूल बीज मंत्र: ॐ दशमाते नमः। पूजन मंत्र: ॐ नमो दशामाते सर्वमंगलप्रदायै नमः। गृहकल्याणं कुरु कुरु स्वाहा
दशा माता आरती (Dasha Mata Aarti)
आरती श्री दशा माता की।
जय सत-चित्त आनंद दाता की।
भय भंजनि अरु दशा सुधारिणी।
पाप -ताप-कलि कलुष विदारणी।
शुभ्र लोक में सदा विहारणी।
जय पालिनी दिन जनन की।
आरती श्री दशा माता की॥
अखिल विश्व- आनंद विधायिनी।
मंगलमयी सुमंगल दायिनी।
जय पावन प्रेम प्रदायिनी।
अमिय-राग-रस रंगरली की।
आरती श्री दशा माता की॥
नित्यानंद भयो आह्लादिनी।
आनंद घन आनंद प्रसाधिनी।
रसमयि रसमय मन- उन्मादिनी।
सरस कमलिनी विष्णुआली की।
आरती श्री दशा माता की॥

