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Chhath Puja Vidhi: नहाय-खाय से सूर्य देव को अर्घ्य देने तक जानें छठ पूजा की पूरी विधि

Chhath Puja Vidhi: छठ पूजा में नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य का विशेष महत्व माना जाता है। जानें छठ पूजा की सामग्री, चारों दिनों की पूजा विधि, सूर्य देव को अर्घ्य देने का तरीका और जरूरी नियम।

Chhath Puja Vidhi: नहाय-खाय से सूर्य देव को अर्घ्य देने तक जानें छठ पूजा की पूरी विधि
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छठ पूजा की विधि: जानें नहाय-खाय से लेकर सूर्य देव को अर्घ्य देने तक की पूरी पूजा विधि

छठ पूजा भगवान सूर्य और छठी मैया को समर्पित प्रमुख पर्व है। इस पूजा में सूर्य देव को अर्घ्य देकर परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और संतान की खुशहाली की कामना की जाती है। छठ पूजा में साफ-सफाई, सात्विकता और नियमों का विशेष महत्व माना जाता है। यह पूजा चार चरणों में पूरी होती है, जिसमें नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य शामिल हैं।

छठ पूजा की सामग्री

छठ पूजा के लिए पहले से सभी सामग्री तैयार कर लें। पूजा में आमतौर पर बांस का सूप और दउरा, ठेकुआ, गन्ना, नारियल, केला, अन्य फल, गुड़, गेहूं का आटा, चावल, दूध, घी, दीपक, धूप, फूल, सिंदूर और अक्षत आदि का इस्तेमाल किया जाता है। सामग्री में स्थानीय और पारिवारिक परंपरा के अनुसार बदलाव हो सकता है।

1. नहाय-खाय की पूजा विधि

छठ पूजा की शुरुआत नहाय-खाय से होती है। इस दिन व्रती सुबह स्नान करके सूर्य देव का ध्यान करते हैं और व्रत का संकल्प लेते हैं। इसके बाद घर और रसोई की अच्छी तरह सफाई की जाती है।

इस दिन सात्विक भोजन तैयार किया जाता है। भोजन बनाने और ग्रहण करने में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है। नहाय-खाय के साथ ही छठ पूजा के नियमों की शुरुआत मानी जाती है।

2. खरना की पूजा विधि

छठ पूजा के दूसरे दिन खरना किया जाता है। इस दिन व्रती दिनभर उपवास रखते हैं और शाम के समय पूजा करने के बाद प्रसाद ग्रहण करते हैं।

खरना के प्रसाद में मुख्य रूप से गुड़ की खीर और रोटी बनाई जाती है। प्रसाद तैयार करने से लेकर पूजा करने तक स्वच्छता और सात्विकता का ध्यान रखा जाता है। खरना का प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रती निर्जला व्रत रखते हैं।

3. संध्या अर्घ्य की विधि

छठ पूजा के तीसरे दिन संध्या के समय अस्त होते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इसके लिए व्रती पूजा की सामग्री और प्रसाद को सूप या दउरा में सजाते हैं।

सूप में ठेकुआ, फल, गन्ना, नारियल और अन्य प्रसाद रखा जाता है। इसके बाद व्रती परिवार के सदस्यों के साथ छठ घाट या किसी स्वच्छ जलाशय के पास जाते हैं।

सूर्यास्त के समय व्रती जल में खड़े होकर सूर्य देव को जल अर्पित करते हैं। इस दौरान सूर्य देव और छठी मैया का ध्यान करके परिवार की सुख-शांति और मंगल की कामना की जाती है।

4. उषा अर्घ्य की विधि

छठ पूजा के अंतिम दिन सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। व्रती सूर्योदय से पहले पूजा सामग्री लेकर घाट पर पहुंचते हैं।

सूर्य देव के उदय होने पर जल में खड़े होकर उन्हें अर्घ्य दिया जाता है। इसके साथ सूप में रखे फल और प्रसाद सूर्य देव को अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद छठी मैया की पूजा और प्रार्थना की जाती है।

उषा अर्घ्य के बाद व्रती अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार व्रत का पारण करते हैं। इसी के साथ छठ पूजा की विधि पूरी होती है।

सूर्य देव को अर्घ्य देने की विधि

सूर्य देव को अर्घ्य देने के लिए साफ जल को पात्र में लें और सूर्य की ओर मुख करके खड़े हों। दोनों हाथों से धीरे-धीरे सूर्य देव को जल अर्पित करें। इस दौरान सूर्य देव का ध्यान करते हुए अपनी श्रद्धा के अनुसार मंत्र या प्रार्थना कर सकते हैं।

इसके बाद सूप में रखे प्रसाद को सूर्य देव को समर्पित करें और छठी मैया से परिवार की सुख-शांति एवं मंगल की प्रार्थना करें।

छठ पूजा में रखें इन बातों का ध्यान

छठ पूजा के दौरान पूजा स्थल और प्रसाद बनाने की जगह की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। प्रसाद बनाते समय सात्विकता बनाए रखें। पूजा सामग्री को साफ स्थान पर रखें और घाट पर अर्घ्य देते समय पानी की गहराई तथा भीड़ का ध्यान रखें।

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