Chaitra Navratri 2026: अखंड ज्योति जलाने के नियम, सही दिशा और इसका महत्व
Chaitra Navratri 2026: जानें अखंड ज्योति क्या है, इसे किस दिशा में जलाना शुभ होता है और क्या हैं इसके जरूरी नियम। पढ़ें सही विधि और नवरात्रि में इसका धार्मिक महत्व।

चैत्र नवरात्रि 2026: अखंड ज्योति जलाने के नियम और सही दिशा
चैत्र नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की पूजा में अखंड ज्योति जलाना बेहद शुभ माना जाता है। यह ज्योति पूरे 9 दिनों तक लगातार जलती रहती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा, शांति और देवी कृपा का प्रतीक मानी जाती है। द्रिक पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवरात्रि आरंभ होती है, जो दशमी तिथि को पारण के साथ समाप्त होती है। इस साल चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक रहेगी। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करते हैं। इस दौरान साधक कलश स्थापना के साथ अखंड ज्योति भी जलाते हैं, जो नवरात्रि से आरंभ होकर समापन तक जलती रहती है। ऐसा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और अकाल मृत्यु से बचाव हो सकता है। देवीभागवत पुराण और वास्तु शास्त्र में अखंड ज्योति के बारे में विस्तार से बताया गया है। आइए जानते हैं अखंड ज्योति किस दिशा में जलाने से क्या लाभ मिलता हैं और नियमों के बारे में
क्या है अखंड ज्योति?
अखंड ज्योति वह दीपक होता है, जो तेल या फिर घी से लगाया जाता है। ये दीपक नवरात्रि के अलावा व्रत या किसी मांगलिक अवसर पर लगातार जलाया जाता है। इसे ‘अखंड’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह निरंतर, अविरल रूप से जलती रहती है। नवरात्रि के दौरान ये पूरे 9 दिन निरंतर जलती रहती हैं। ये चैत्र नवरात्रि के आरंभ से अंत तक बुझाए बिना जलाया जाता है। इसे जलाने से घर में सुख-शांति, समृद्धि के साथ स्वास्थ्य अच्छा रहता है।
अखंड ज्योति जलाने की दिशा और लाभ
पूर्व दिशा – वास्तु शास्त्र इस दिशा में ज्योति जलाने से मां दुर्गा अति प्रसन्न होती हैं। घर में सुख-शांति और धन-वैभव की प्राप्ति होती है।
पश्चिम दिशा – चैत्र नवरात्रि के दौरान इस दिशा में अखंड ज्योति रखने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं, जिससे समृद्धि और संपन्नता मिलती है।
उत्तर दिशा – वास्तु शास्त्र में इस दिशा को काफी शुभ माना जाता है, क्योंकि ये दिशा कुबेर भगवान की दिशा मानी जाती है। इस दिशा में अखंड ज्योति जलाने से सुख-समृद्धि आती है और अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है।
दक्षिण-पूर्व दिशा (आग्नेय कोण) – सबसे अधिक शुभ दिशा मानी जाती है। इस ओर ज्योति जलाने से घर में खुशहाली और समृद्धि आती है।
दक्षिण दिशा – इस दिशा की ओर कभी भी अखंड ज्योति नहीं जलानी चाहिए, क्योंकि इसे यमराज की दिशा माना जाता है। इस दिशा में ज्योति जलाने से धन हानि, बीमारी और मृत्यु का योग बन सकता है।
अखंड ज्योति के जरूरी नियम
ज्योति लगातार जलती रहनी चाहिए
पूरे नवरात्रि में दीपक बुझना नहीं चाहिए
इसे अखंड रखना सबसे महत्वपूर्ण नियम है
सही सामग्री का उपयोग
घी या तिल के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है
रूई की बत्ती का प्रयोग करें
घर खाली न छोड़ें
अगर घर में अखंड ज्योति जलाई है तो घर को पूरी तरह खाली नहीं छोड़ना चाहिए
सुरक्षित स्थान पर रखें
दीपक ऐसी जगह रखें जहां हवा से बुझने का डर न हो
बच्चों और पालतू जानवरों से दूर रखें
रोज पूजा और ध्यान
सुबह-शाम दीपक के पास मंत्र जाप और आरती करें
“ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” मंत्र का जप विशेष फलदायी माना जाता है
चैत्र नवरात्रि पर अखंड ज्योति जलाते समय बोलें ये मंत्र ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कृपालिनी दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।। दीपज्योति: परब्रह्म: दीपज्योति जनार्दन: दीपोहरतिमे पापं संध्यादीपं नामोस्तुते। शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यम् धनसंपदा। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपकाय नमोऽस्तु ते

