खजराना गणेश मंदिर: इतिहास, धार्मिक महत्व, दर्शन का समय और कैसे पहुंचें
मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित खजराना गणेश मंदिर का इतिहास, धार्मिक महत्व, मंदिर की विशेषताएं और यात्रा की पूरी जानकारी पढ़ें। जानें क्यों यह मंदिर मनोकामना पूर्ति के लिए प्रसिद्ध है।

खजराना गणेश मंदिर: इतिहास, महत्व और कैसे पहुंचें
खजराना गणेश मंदिर मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में स्थित भगवान श्री गणेश का एक अत्यंत प्रसिद्ध और श्रद्धेय मंदिर है। यह मंदिर देश के प्रमुख गणेश मंदिरों में गिना जाता है। मान्यता है कि यहां श्रद्धापूर्वक दर्शन और पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
खजराना गणेश मंदिर का इतिहास
खजराना गणेश मंदिर का निर्माण वर्ष 1735 में मराठा साम्राज्य की प्रसिद्ध शासिका देवी अहिल्याबाई होल्कर ने करवाया था। माना जाता है कि मुगल शासक औरंगजेब के काल में भगवान गणेश की प्रतिमा को सुरक्षित रखने के लिए एक कुएं में छिपा दिया गया था। बाद में स्थानीय पुजारी पंडित मंगल भट्ट को स्वप्न में इस प्रतिमा का संकेत मिला, जिसके बाद प्रतिमा को बाहर निकालकर मंदिर की स्थापना की गई।
धार्मिक महत्व
खजराना गणेश मंदिर को मनोकामना पूर्ति का मंदिर कहा जाता है। यहां श्रद्धालु अपनी इच्छा पूरी होने की कामना से मंदिर परिसर में धागा बांधते हैं और इच्छा पूरी होने पर दोबारा दर्शन के लिए आते हैं। वहीं कई भक्त भगवान गणेश की प्रतिमा के पीछे उल्टा स्वास्तिक बनाते हैं। स्थानीय लोगों के साथ-साथ देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं में इस मंदिर के प्रति विशेष आस्था देखने को मिलती है।
मंदिर की विशेषताएं
मंदिर का मुख्य गर्भगृह चांदी से सुसज्जित है और भगवान गणेश की प्रतिमा पर विशेष आभूषण चढ़ाए जाते हैं। मंदिर परिसर में भगवान शिव, माता दुर्गा, हनुमान जी, साईं बाबा और अन्य देवी-देवताओं के भी मंदिर मौजूद हैं। समय के साथ यह मंदिर एक विशाल धार्मिक परिसर के रूप में विकसित हो चुका है।
कैसे पहुंचे खजराना गणेश मंदिर
मंदिर से सबसे पास हवाई अड्डा देवी अहिल्याबाई होल्कर एयरपोर्ट है, जो मंदिर से लगभग 8 से 10 किलोमीटर दूर है। वहीं एयरपोर्ट से टैक्सी और ऑटो आसानी से मिल जाते हैं। वहीं अगर आप रेल से आ रहे हैं तो इंदौर रेलवे स्टेशन मंदिर से 5 से 6 किलोमीटर दूर है।

