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जागेश्वर मंदिर उत्तराखंड: इतिहास, धार्मिक महत्व, दर्शन समय, यात्रा गाइड और कैसे पहुंचें

अल्मोड़ा के घने देवदार जंगलों के बीच स्थित जागेश्वर धाम भगवान शिव का अत्यंत प्राचीन और चमत्कारी मंदिर समूह माना जाता है। जानें इसका इतिहास, महत्व और यात्रा से जुड़ी पूरी जानकारी।

जागेश्वर मंदिर उत्तराखंड: इतिहास, धार्मिक महत्व, दर्शन समय, यात्रा गाइड और कैसे पहुंचें
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जागेश्वर मंदिर: उत्तराखंड का प्राचीन शिव धाम, जानें इतिहास, महत्व और कैसे पहुंचें

उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थित जागेश्वर धाम भगवान शिव को समर्पित भारत के सबसे प्राचीन मंदिर समूहों में से एक माना जाता है। देवदार के घने जंगलों और जटा गंगा नदी के किनारे स्थित यह धाम अपनी आध्यात्मिक महत्ता, प्राचीन वास्तुकला और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है।

जागेश्वर मंदिर का इतिहास

इतिहासकारों के अनुसार जागेश्वर धाम मंदिर समूह का निर्माण मुख्य रूप से 7वीं से 14वीं शताब्दी के बीच कत्यूरी और चंद शासकों के संरक्षण में हुआ। यहां 100 से अधिक प्राचीन पत्थर के मंदिर मौजूद हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण में मौजूद यह मंदिर समूह उत्तराखंड की महत्वपूर्ण धरोहरों में शामिल है।

मंदिर परिसर में क्या है खास?

जागेश्वर धाम में 124 से अधिक छोटे-बड़े मंदिर हैं। इनमें जागेश्वर महादेव, महामृत्युंजय मंदिर, नवदुर्गा मंदिर, कालिका मंदिर, सूर्य मंदिर और नीलकंठेश्वर मंदिर प्रमुख हैं। मंदिरों पर बनी नक्काशी, शिलालेख और प्राचीन मूर्तियां यहां आने वाले श्रद्धालुओं को इतिहास और आध्यात्मिकता का अनुभव कराती हैं।

जागेश्वर धाम का महत्व

जागेश्वर धाम को भगवान शिव की तपोस्थली माना जाता है। कई धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह स्थान द्वादश ज्योतिर्लिंगों से भी जुड़ा हुआ माना जाता है। स्कंद पुराण, शिव पुराण और लिंग पुराण में भी इस क्षेत्र का उल्लेख मिलता है। यहां स्थित महामृत्युंजय मंदिर विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जहां श्रद्धालु दीर्घायु और स्वास्थ्य की कामना से पूजा-अर्चना करते हैं

जागेश्वर धाम कैसे पहुंचे?

जागेश्वर धाम अल्मोड़ा से लगभग 35 किलोमीटर दूर है। अल्मोड़ा, हल्द्वानी, नैनीताल और काठगोदाम से यहां के लिए नियमित टैक्सी और बस सेवाएं उपलब्ध हैं। वहीं सबसे पास रेलवे स्टेशन काठगोदाम है, जो जागेश्वर से लगभग 120 किलोमीटर दूर है। स्टेशन से टैक्सी या बस द्वारा मंदिर पहुंचा जा सकता है। वहीं सबसे पास हवाई अड्डा पंतनगर एयरपोर्ट है। यहां से सड़क मार्ग द्वारा अल्मोड़ा होते हुए जागेश्वर धाम पहुंचा जा सकता है।

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