Rashifal Today

डोड्डा गणपति मंदिर, बेंगलुरु: जानें इतिहास, धार्मिक महत्व और कैसे पहुंचें भगवान गणेश के भव्य धाम

बेंगलुरु के प्रसिद्ध डोड्डा गणपति मंदिर का इतिहास, विशाल एकाश्म गणेश प्रतिमा, धार्मिक महत्व, बेन्ने अलंकार, गणेश चतुर्थी उत्सव, विजयनगर शैली की वास्तुकला और मंदिर तक कैसे पहुंचें, जानें संपूर्ण जानकारी।

डोड्डा गणपति मंदिर, बेंगलुरु: जानें इतिहास, धार्मिक महत्व और कैसे पहुंचें भगवान गणेश के भव्य धाम
X

डोड्डा गणपति मंदिर, बेंगलुरु: जानें इतिहास, धार्मिक महत्व और कैसे पहुंचें भगवान गणेश के भव्य धाम

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के बसवनगुड़ी क्षेत्र में स्थित डोड्डा गणपति मंदिर भगवान गणेश के सबसे प्रसिद्ध और प्राचीन मंदिरों में से एक है। कन्नड़ भाषा में "डोड्डा" का अर्थ "बड़ा" होता है, इसलिए इस मंदिर का नाम डोड्डा गणपति पड़ा। यहां स्थापित भगवान गणेश की विशाल एकाश्म (एक ही पत्थर से बनी) प्रतिमा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र

क्या है डोडा गणपति मंदिर का इतिहास?

‘डोडा’ शब्द कन्नड़ भाषा का है, जिसका अर्थ होता है “विशाल”। माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 16वीं शताब्दी में बेंगलुरु के संस्थापक केम्पेगौड़ा प्रथम के समय कराया गया था। मान्यता है कि उन्हें एक विशाल शिला पर भगवान गणेश की आकृति दिखाई दी, जिसके बाद उसी एक पत्थर को तराशकर भव्य गणेश प्रतिमा बनाई गई। यह मंदिर विजयनगर स्थापत्य शैली की झलक भी प्रस्तुत करता है और आज भी बेंगलुरु की सबसे प्रसिद्ध धार्मिक धरोहरों में गिना जाता है।

मंदिर का धार्मिक महत्व

डोडा गणपति मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित भगवान गणेश की विशाल एकाश्म प्रतिमा है, जिसकी ऊंचाई लगभग 18 फीट और चौड़ाई करीब 16 फीट बताई जाती है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह प्रतिमा समय के साथ बढ़ रही है। मंदिर में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और शुभ कार्यों के आरंभ के देवता के रूप में पूजा जाता है। गणेश चतुर्थी के अवसर पर यहां विशेष उत्सव आयोजित होता है। इसके अलावा ‘बेन्ने अलंकार’ भी बेहद प्रसिद्ध है, जिसमें भगवान गणेश की प्रतिमा को लगभग 100 किलोग्राम मक्खन से सजाया जाता है।

कैसे पहुंचे डोडा गणपति मंदिर?

डोडा गणपति मंदिर कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के दक्षिणी हिस्से के बसवनगुड़ी क्षेत्र में बुल टेंपल रोड पर स्थित है। मंदिर से सबसे पास हवाई अड्डा केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जहां से टैक्सी या कैब द्वारा मंदिर पहुंचा जा सकता है। वहीं बेंगलुरु सिटी रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी लगभग 6 किलोमीटर है। यहां से ऑटो, टैक्सी या BMTC बस की सुविधा उपलब्ध है।

Tags:
Next Story