जुलाई का दूसरा रवि प्रदोष व्रत 2026: जानें सही तिथि, प्रदोष काल, पूजा मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व

Ravi Pradosh Vrat 2026: जुलाई 2026 का दूसरा रवि प्रदोष व्रत कब है? जानें 26 जुलाई की सही तिथि, प्रदोष काल, पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत का महत्व और शिव आराधना के लाभ।

Published On 2026-07-20 18:25 GMT   |   Update On 2026-07-20 18:25 GMT

जुलाई का दूसरा रवि प्रदोष व्रत 2026: जानें सही तिथि, प्रदोष काल, पूजा मुहूर्त, विधि और महत्व

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना को समर्पित माना जाता है। प्रत्येक माह कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। जब यह व्रत रविवार के दिन पड़ता है, तो इसे रवि प्रदोष व्रत कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधिपूर्वक शिव पूजा करने से सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में खुशहाली का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

जुलाई 2026 का दूसरा रवि प्रदोष व्रत कब है?

वर्ष 2026 में जुलाई महीने का दूसरा रवि प्रदोष व्रत 26 जुलाई, रविवार को रखा जाएगा। यह प्रदोष व्रत शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर पड़ रहा है।

रवि प्रदोष व्रत पूजा का शुभ मुहूर्त

प्रदोष व्रत पर प्रदोष काल में पूजा करना शुभ माना जाता है। पंचांग के अनुसार 26 जुलाई को प्रदोष काल शाम 07 बजकर 16 मिनट से रात 09 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। ऐसे में सभी भक्त इस 02 घंटे 05 मिनट की अवधि में पूजा कर सकते हैं। 

रवि प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में रवि प्रदोष व्रत का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान शिव, माता पार्वती तथा सूर्यदेव की पूजा करने से साधक को अनेक शुभ फलों की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से जीवन में सुख-समृद्धि, आरोग्य, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। जिन लोगों की कुंडली में सूर्य कमजोर हो या पिता से जुड़े संबंधों में कठिनाइयां हों, वे भी श्रद्धा के साथ इस व्रत का पालन करते हैं।

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