चैत्र नवरात्रि व्रत कथा 2026: जानें पूरी कहानी, व्रत विधि और महत्व

चैत्र नवरात्रि का व्रत केवल पूजा ही नहीं, बल्कि आस्था, श्रद्धा और आत्मशुद्धि का पर्व है। इस दौरान मां दुर्गा के 9 रूपों की पूजा की जाती है और व्रत कथा सुनना बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि नवरात्रि के इन नौ दिनों में मां दुर्गा पृथ्वी पर अपने भक्तों के बीच आती हैं और उनकी सच्ची श्रद्धा से की गई प्रार्थनाओं को स्वीकार करती हैं। वहीं नवरात्रि के दिनों में कई भक्त नौ दिन का व्रत रखते हैं। साथ ही मां की विशेष पूजा- अर्चना भी करते हैं। वहीं पूजा- अर्चना के बाद व्रत कथा पाठ करना भी जरूरी माना जाता है। आइए जानते हैं इस व्रत कथा के बारे में

नवरात्रि व्रत कथा (Navratri Vrat Katha In Hindi)

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार देवगुरु बृहस्पति ने ब्रह्माजी से नवरात्रि व्रत का महत्व पूछा। ब्रह्माजी ने बताया कि यह व्रत करने से संतान सुख, धन, विद्या और समृद्धि प्राप्त होती है। इसके प्रभाव से रोग दूर होते हैं और पापों से मुक्ति मिलती है। इस व्रत को न करने वाले व्यक्ति को जीवन में कई तरह के कष्टों का सामना करना पड़ता है। एक समय की बात है, मनोहर नगर में पीठत नाम का ब्राह्मण रहता था। उसकी बेटी सुमति माता दुर्गा की बड़ी भक्त थी। लेकिन एक दिन वह पूजा में नहीं पहुंच पाई, जिससे उसके पिता नाराज हो गए और गुस्से में उसका विवाह एक कुष्ठ रोगी से कर दिया। विवाह के बाद सुमति अपने पति के साथ जंगल में चली गई। सुमति के दुख को देखकर मां दुर्गा उसके सामने प्रकट हुईं और वरदान मांगने को कहा। सुमति ने अपने पति के कुष्ठ रोग से मुक्ति की प्रार्थना की। देवी ने उसे बताया कि पिछले जन्म में उसने अनजाने में नवरात्रि का व्रत रखा था, जिसके पुण्य से आज उसे यह आशीर्वाद मिल रहा है। मां दुर्गा की कृपा से उसका पति ठीक हो गया और वे सुखी जीवन जीने लगे। मां दुर्गा ने सुमति को नवरात्रि व्रत की विधि भी बताई। इस व्रत में नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा करनी चाहिए। यदि पूरे दिन व्रत रखना कठिन हो, तो एक समय भोजन किया जा सकता है। घटस्थापना कर, देवी के लिए फल, फूल और प्रसाद अर्पित करना चाहिए। व्रत के अंतिम दिन हवन और कन्या पूजन करने से विशेष फल प्राप्त होता हैल ब्रह्माजी ने कहा कि जो व्यक्ति भक्तिभाव से यह व्रत करता है, उसे जीवन में सभी सुख-संपत्तियां मिलती हैं। इस व्रत का पुण्य करोड़ों गुना बढ़ जाता है और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही देवी मां के आशीर्वाद से जीवन की सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं।

नवरात्रि व्रत विधि

सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें

घर में घटस्थापना (कलश स्थापना) करें

मां दुर्गा की प्रतिमा/चित्र स्थापित करें

रोज सुबह-शाम पूजा, आरती और मंत्र जाप करें

दुर्गा सप्तशती/दुर्गा चालीसा का पाठ करें

फलाहार या एक समय भोजन करें

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