जुलाई 2026 में पड़ने वाली सभी एकादशी: तिथि, पूजा विधि, व्रत नियम, महत्व और धार्मिक जानकारी

जुलाई 2026 की सभी एकादशी: जानें जुलाई 2026 में कब-कब एकादशी है। पढ़ें योगिनी एकादशी (11 जुलाई 2026) और देवशयनी/हरिशयनी एकादशी (25 जुलाई 2026) की तिथि, शुभ महत्व, पूजा विधि, व्रत के नियम, पारण, धार्मिक मान्यताएं और भगवान विष्णु की आराधना से जुड़े विशेष उपाय। एक ही लेख में जुलाई 2026 की दोनों एकादशियों की संपूर्ण जानकारी।

Published On 2026-07-09 17:21 GMT   |   Update On 2026-07-09 17:21 GMT

जुलाई 2026 में पड़ने वाली सभी एकादशी: जानें तिथि, महत्व, पूजा विधि और व्रत का धार्मिक महत्व

सनातन धर्म में एकादशी तिथि भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना के लिए सबसे पवित्र दिनों में से एक मानी जाती है। हर महीने दो एकादशी आती हैं—एक कृष्ण पक्ष में और दूसरी शुक्ल पक्ष में। धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है, मन और शरीर की शुद्धि होती है तथा आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।

जुलाई 2026 में कुल दो एकादशी पड़ रही हैं। आइए जानते हैं इन दोनों एकादशियों की तिथि, महत्व, पूजा-विधि और धार्मिक मान्यताओं के बारे में।

जुलाई 2026 में पड़ने वाली एकादशियों की सूची

एकादशी

तिथि

वार

योगिनी एकादशी

11 जुलाई 2026

शनिवार

देवशयनी (हरिशयनी/आषाढ़ी) एकादशी

25 जुलाई 2026

शनिवार

1. योगिनी एकादशी (11 जुलाई 2026)

योगिनी एकादशी आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी होती है। इसका उल्लेख पद्म पुराण सहित कई धार्मिक ग्रंथों में मिलता है।

धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की श्रद्धापूर्वक पूजा और व्रत करने से व्यक्ति को अपने पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि आती है।

योगिनी एकादशी का महत्व

भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग खुलता है।

दान-पुण्य का विशेष फल मिलता है।

मन में सकारात्मकता और शांति का संचार होता है।

पूजा विधि

प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।

भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें।

तुलसी दल, पीले फूल और फल अर्पित करें।

"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें।

विष्णु सहस्रनाम और एकादशी व्रत कथा का पाठ करें।

शाम को भगवान विष्णु की आरती करें।

2. देवशयनी एकादशी (25 जुलाई 2026)

देवशयनी एकादशी को हरिशयनी एकादशी, आषाढ़ी एकादशी और पद्मा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। यह आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी होती है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसी दिन से चातुर्मास का आरंभ माना जाता है, जो देवउठनी एकादशी तक चलता है।

देवशयनी एकादशी का महत्व

चातुर्मास का शुभारंभ होता है।

भगवान विष्णु की विशेष पूजा का विधान है।

विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है।

भक्ति, जप, तप और दान का महत्व बढ़ जाता है।

पूजा विधि

ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें।

भगवान विष्णु का पंचामृत से अभिषेक करें (यदि संभव हो)।

पीले वस्त्र, चंदन, तुलसी और पीले पुष्प अर्पित करें।

विष्णु सहस्रनाम और श्रीहरि के मंत्रों का जाप करें।

घी का दीपक जलाकर आरती करें।

जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करें।

एकादशी व्रत के सामान्य नियम

सात्विक भोजन करें या व्रत के नियमों का पालन करें।

मांस, मदिरा और तामसिक भोजन से दूर रहें।

धार्मिक परंपरा के अनुसार चावल का सेवन नहीं किया जाता।

क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से बचें।

भगवान विष्णु का स्मरण, मंत्र जाप और भजन-कीर्तन करें।

यथाशक्ति दान-पुण्य करें।

एकादशी के दिन क्या करें?

भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें।

तुलसी दल अर्पित करें।

भगवद्गीता या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।

गरीब और जरूरतमंद लोगों की सहायता करें।

परिवार के साथ आरती और भजन करें।

एकादशी का आध्यात्मिक महत्व

एकादशी केवल उपवास का दिन नहीं है, बल्कि आत्मसंयम, सदाचार, सेवा और ईश्वर भक्ति का पर्व भी है। यह तिथि व्यक्ति को अपने जीवन में अनुशासन, सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक जागरूकता अपनाने की प्रेरणा देती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धा और नियमपूर्वक एकादशी व्रत करने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। हालांकि, इन मान्यताओं को धार्मिक आस्था के रूप में देखा जाना चाहिए।

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