गायत्री जयंती 2026: कब है, वेदमाता गायत्री कौन हैं? जानें गायत्री मंत्र, कथा और पूजा विधि

जानें गायत्री जयंती 2026 कब है, वेदमाता गायत्री का महत्व, गायत्री मंत्र की उत्पत्ति, पौराणिक कथा, पूजा विधि और इस पावन पर्व का धार्मिक महत्व।

Published On 2026-06-26 17:15 GMT   |   Update On 2026-06-26 17:15 GMT

गायत्री जयंती 2026: वेदमाता गायत्री कौन हैं? जानें गायत्री मंत्र की उत्पत्ति और पौराणिक कथा

हिंदू धर्म में गायत्री जयंती का विशेष महत्व माना जाता है। यह दिन वेदमाता गायत्री के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता गायत्री ज्ञान, बुद्धि, आध्यात्मिक चेतना और वेदों की अधिष्ठात्री देवी हैं। इसी कारण उन्हें वेदमाता कहा जाता है।

गायत्री जयंती 2026 कब है?

धार्मिक पंचांग के अनुसार गायत्री जयंती ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। हालांकि कुछ परंपराओं में इसे श्रावण पूर्णिमा के दिन भी मनाने की मान्यता है। इसी कारण विभिन्न क्षेत्रों में इसकी तिथि को लेकर मतभेद देखने को मिलते हैं।

कौन हैं मां गायत्री?

मां गायत्री को वेदमाता कहा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार वे देवी सरस्वती, लक्ष्मी और पार्वती का संयुक्त स्वरूप हैं। उन्हें ज्ञान, समृद्धि और शक्ति की प्रतीक माना जाता है। भक्तों का विश्वास है कि मां गायत्री की उपासना से जीवन में सुख, शांति, विवेक और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

गायत्री मंत्र –

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥ यह मंत्र सूर्य स्वरूप परमात्मा से बुद्धि को प्रकाशित करने और सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने की प्रार्थना है। क्यों किया जाता है गायत्री मंत्र का जाप? धार्मिक ग्रंथों में गायत्री मंत्र को अत्यंत प्रभावशाली और पवित्र मंत्र बताया गया है। मान्यता है कि इसका श्रद्धापूर्वक जाप करने से नकारात्मक विचार दूर होते हैं, मन एकाग्र होता है और व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसके साथ ही यह मंत्र आध्यात्मिक उन्नति और आत्मिक शुद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है

गायत्री जयंती की पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान ब्रह्मा एक महायज्ञ करना चाहते थे, लेकिन यज्ञ में पत्नी की उपस्थिति आवश्यक थी। जब देवी सरस्वती समय पर नहीं पहुंचीं, तब भगवान ब्रह्मा ने मां गायत्री को अपने साथ यज्ञ में शामिल किया। बाद में मां गायत्री को ब्रह्मा की शक्ति और वेदों की अधिष्ठात्री देवी के रूप में प्रतिष्ठित किया गया। एक अन्य मान्यता के अनुसार महर्षि विश्वामित्र ने कठोर तपस्या के बाद गायत्री मंत्र का साक्षात्कार किया था।

गायत्री जयंती का महत्व

गायत्री जयंती केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना का उत्सव भी है। इस दिन श्रद्धालु गायत्री मंत्र का जाप, हवन, पूजा-पाठ और दान-पुण्य करते हैं। माना जाता है कि मां गायत्री की कृपा से व्यक्ति को सफलता, स्वास्थ्य, समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

गायत्री जयंती पर कैसे करें पूजा?

प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। मां गायत्री की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। विधि-विधान से पूजा करें। गायत्री चालीसा, आरती और गायत्री मंत्र का जाप करें।

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