शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या क्या होती है? महत्व और उपाय

वैदिक ज्योतिष में शनि देव को कर्मफल देने वाला ग्रह माना जाता है। कहा जाता है कि शनि व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं, इसलिए उनकी चाल का जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। शनि से जुड़े दो प्रमुख प्रभाव होते हैं — शनि की साढ़ेसाती और शनि की ढैय्या।  शनि ग्रह को ज्योतिष में आयु, दुख, रोग, पीड़ा, विज्ञान, तकनीकी, लोहा, खनिज तेल, कर्मचारी, सेवक, जेल आदि का कारक माना जाता है। साथ ही शनि देव मकर और कुंभ राशि के स्वामी हैं। वहीं तुला राशि शनि की उच्च राशि है जबकि मेष इसकी नीच राशि मानी जाती है। शनि देव का गोचर एक राशि में ढ़ाई वर्ष तक रहता है और यह ज्योतिष में सबसे धीमी गति से संचऱण करते हैं। वहीं  यह व्यक्ति के कर्मों के अनुसार फल देने वाले ग्रह माने जाते हैं। यहां हम बात करने जा रहे हैं शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के बारे में, जिसका नाम सुनकर व्यक्ति के अंदर भय बैठ जाता है। लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। ज्योतिष में शनि ग्रह को भले एक क्रूर ग्रह माना जाता है परंतु यह पीड़ित होने पर ही जातकों को नकारात्मक फल देते हैं। यदि किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली में शनि देव उच्च होकर विराजमान हैं तो वह उस व्यक्ति रंक से राज बना सकते हैं।

शनि की साढ़ेसाती क्या होती है?

शनि की साढ़ेसाती लगभग 7.5 वर्ष (साढ़े सात साल) तक चलने वाला समय होता है।

यह तब शुरू होती है जब शनि ग्रह किसी व्यक्ति की जन्म राशि (चंद्र राशि) से पहले वाली राशि में प्रवेश करते हैं और उसके बाद जन्म राशि तथा अगली राशि से होकर गुजरते हैं।

साढ़ेसाती के तीन चरण

पहला चरण : जब शनि जन्म राशि से 12वें भाव में आते हैं

दूसरा चरण : जब शनि जन्म राशि में आते हैं (सबसे प्रभावशाली)

तीसरा चरण : जब शनि जन्म राशि से दूसरे भाव में आते हैं

हर चरण लगभग 2.5 साल का होता है, इसलिए पूरी अवधि 7.5 साल होती है।

 प्रभाव

जीवन में चुनौतियाँ और देरी

आर्थिक या मानसिक तनाव

जिम्मेदारियाँ बढ़ना

लेकिन मेहनत करने पर सफलता भी मिल सकती है।

शनि की ढैय्या क्या होती है?

शनि की ढैय्या का समय लगभग 2.5 साल का होता है।

ज्योतिष के अनुसार यह तब लगती है जब शनि किसी व्यक्ति की कुंडली के चौथे या आठवें भाव में आते हैं।

ढैय्या के दौरान

अचानक समस्याएँ,स्वास्थ्य या आर्थिक परेशानी, मानसिक तनाव, कामों में रुकावट, लेकिन यह समय भी व्यक्ति को धैर्य और अनुशासन सिखाने वाला माना जाता है।

साढ़ेसाती और ढैय्या के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए करें ये उपाय

काले कुत्ते को रोटी या रस्क खिलाएं

शनिवार के दिन काले कुत्ते को सरसों के तेल से चुपड़ी रोटी या रस्क खिलाएं। ऐसा करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं और आप शनि देव के प्रकोप से बच सकते हैं।

शनि रक्षा स्त्रोत और चालीसा का पाठ करें

शनिवार को शनि मंंदिर में जाकर शनि प्रतिमा के सामने शनि चालीसा और शनि रक्षा स्त्रोत का पाठ करें। ऐसा करने से आपको ढैय्या और साढ़ेसाती से मुक्ति मिल सकती है।

इस मंत्र का करें जाप

अगर आप शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से परेशान हैं तो शनि देव के तांत्रिक मंत्र “ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः” का 108 बार जाप करें। इस मंत्र का जाप आप प्रतिदिन भी कर सकते हैं। ऐसा करने से आपको शनि देव का आशीर्वाद प्राप्त होगा।

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