गुरु महादशा 16 साल तक करती है प्रभाव: जानिए इसके नुकसान और राहत के उपाय

गुरु महादशा 16 वर्षों तक जीवन पर गहरा प्रभाव डालती है। जानिए गुरु महादशा के शुभ-अशुभ प्रभाव, करियर, विवाह, स्वास्थ्य पर असर और गुरु ग्रह को मजबूत करने के आसान उपाय।

Published On 2026-05-07 16:22 GMT   |   Update On 2026-05-07 16:22 GMT

गुरु महादशा 16 साल तक करती है प्रभाव: जानिए इसके नुकसान और राहत के उपाय

Guru Mahadasha Remedies & Effects: वैदिक ज्योतिष के अनुसार गुरु ग्रह की महादशा लगभग 16 साल तक चलती है और इस दौरान जीवन के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर गहरा प्रभाव पड़ता है। अगर कुंडली में गुरु मजबूत हो तो यह समय बहुत शुभ होता है, लेकिन कमजोर या दोषयुक्त होने पर परेशानियां भी दे सकता है।ज्योतिष शास्त्र के अनुसार गुरु ग्रह की स्थिति, दृष्टि और राशि के आधार पर महादशा के फल अलग-अलग हो सकते हैं। कई लोगों के लिए यह समय करियर में उन्नति, विवाह योग, संतान सुख और सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ाने वाला माना जाता है।

क्या होती है गुरु ग्रह की महादशा

ज्योतिष अनुसार गुरु ग्रह की महादशा 16 वर्षों तक रहती है। गुरु ग्रह धनु और मीन राशि का स्वामी माना जाता है तथा कर्क राशि में उच्च का होता है। यदि जन्म कुंडली में गुरु शुभ भाव में स्थित हो, तो इसकी महादशा व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिणाम दे सकती है।

इन राशियों के लिए गुरु की महादशा रहती है शुभ

करियर और व्यापार में लाभ

अगर आपकी कुंडली में गुरु ग्रह शुभ स्थित हैं या उच्च के विराजमान हैं। तो गुरु की शुभ महादशा नौकरी और व्यापार में उन्नति दिला सकती है। इस दौरान नई जिम्मेदारियां, प्रमोशन और आय के नए स्रोत बनने की संभावना रहती है। शिक्षा, बैंकिंग, प्रशासन, अध्यापन और धार्मिक कार्यों से जुड़े लोगों को विशेष लाभ मिल सकता है। गुरु ग्रह धन और वैभव का कारक माना जाता खरीदने के योग भी बनते हैं।

विवाह और पारिवारिक सुख

गुरु ग्रह विवाह और पारिवारिक जीवन के भी कारक माना जाता है। इसलिए अगर गुरु ग्रह सकारात्मक स्थित हैं तो अविवाहित लोगों के विवाह के योग बन सकते हैं, जबकि विवाहित लोगों के रिश्तों में मधुरता बढ़ सकती है। संतान सुख मिलने की संभावना भी रहती है। गुरु महादशा के दौरान व्यक्ति का झुकाव धर्म, पूजा-पाठ और आध्यात्म की ओर बढ़ सकता है। कई लोग इस समय धार्मिक यात्राएं या गुरुजनों का मार्गदर्शन प्राप्त करते हैं।

अगर कुंडली में गुरु ग्रह अशुभ हो विराजमान

गुरु बृहस्पति अगर जन्म कुंडली में अशुभ विराजमान हो तो  व्यक्ति को कार्यक्षेत्र में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। साथ ही व्यक्ति का मन पूजा-पाठ में नहीं लगता है। साथ ही वह नास्तिक भी होता है। व्यक्ति के फैसले लेने में भ्रम रहता है। वैवाहिक जीवन में तनाव रहता है। बृहस्पति ग्रह से व्यक्ति को पेट से सबंधित रोग, अपच, पेट दर्द, एसिडिटी, कमज़ोर पाचन तंत्र, कैंसर जैसी बीमारी होने का ख़तरा रहता है। साथ ही व्यक्ति को वैवाहिक जीवन का सुख प्राप्त नहीं होता है और विवाह होने में बाधा आती है।

गुरु ग्रह को मजबूत करने के उपाय

गुरुवार के दिन करें ये काम

भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की पूजा करें।

पीले वस्त्र और पीली वस्तुओं का दान करें।

केले के पेड़ की पूजा करना शुभ माना जाता है।

जरूरतमंद लोगों को चने की दाल और हल्दी दान करें

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