बुध प्रदोष व्रत कथा: पढ़ें यह चमत्कारी कहानी, जो दिलाए सुख-समृद्धि और हर संकट से मुक्ति
हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व होता है, जो भगवान शिव को समर्पित है। जब यह व्रत बुधवार के दिन पड़ता है, तो इसे बुध प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस दिन व्रत रखने, पूजा-अर्चना करने और व्रत कथा सुनने से व्यक्ति के जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। पौराणिक कथा के अनुसार, एक व्यक्ति ने बुधवार के दिन पत्नी को विदा कराकर गलती की, जिसके कारण उसे अजीब संकट का सामना करना पड़ा। बाद में भगवान शिव की प्रार्थना करने पर उसकी समस्या दूर हो गई और उसे अपनी भूल का एहसास हुआ। यह कथा हमें सिखाती है कि परंपराओं और शुभ-अशुभ समय का सम्मान करना चाहिए। जानें बुध प्रदोष व्रत की पूरी कथा, पूजा विधि, आरती और इसका धार्मिक महत्व, जो आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
बुध प्रदोष व्रत कथा: पढ़ें यह पौराणिक कहानी, जो दिलाती है सुख-समृद्धि और संकटों से मुक्ति
Budh Pradosh Vrat Katha: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। जब यह व्रत बुधवार के दिन पड़ता है, तो इसे बुध प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस दिन व्रत रखने और कथा सुनने का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से जीवन में सुख, समृद्धि और बुद्धि की वृद्धि होती है तथा सभी कष्ट दूर होते हैं।
बुध प्रदोष व्रत कथा | Budh Pradosh Vrat Katha in Hindi
पौराणिक कथा के अनुसार, एक पुरुष का नया-नया विवाह हुआ। विवाह के 2 दिनों बाद उसकी पत्नी मायके चली गई। कुछ दिनों के बाद वह पुरुष पत्नी को लेने उसके यहां गया। बुधवार को जब वह पत्नी के साथ लौटने लगा तो ससुराल पक्ष ने उसे रोकने का प्रयत्न किया कि विदाई के लिए बुधवार शुभ नहीं होता। लेकिन वह नहीं माना और पत्नी के साथ चल पड़ा। नगर के बाहर पहुंचने पर पत्नी को प्यास लगी। पुरुष लोटा लेकर पानी की तलाश में चल पड़ा। पत्नी एक पेड़ के नीचे बैठ गई। थोड़ी देर बाद पुरुष पानी लेकर वापस लौटा, तब उसने देखा कि उसकी पत्नी किसी के साथ हंस-हंसकर बातें कर रही है और उसके लोटे से पानी पी रही है। उसको क्रोध आ गया। वह निकट पहुंचा तो उसके आश्चर्य का कोई ठिकाना न रहा, क्योंकि उस आदमी की सूरत उसी की भांति थी। पत्नी भी सोच में पड़ गई। दोनों पुरुष झगड़ने लगे। भीड़ इकट्ठी हो गई। सिपाही आ गए। हमशक्ल आदमियों को देख वे भी आश्चर्य में पड़ गए। उन्होंने स्त्री से पूछा ‘उसका पति कौन है?’ वह किंकर्तव्यविमूढ़ हो गई। तब वह पुरुष शंकर भगवान से प्रार्थना करने लगा- ‘हे भगवान! हमारी रक्षा करें। मुझसे बड़ी भूल हुई कि मैंने सास-ससुर की बात नहीं मानी और बुधवार को पत्नी को विदा करा लिया। मैं भविष्य में ऐसा कदापि नहीं करूंगा।’
जैसे ही उसकी प्रार्थना पूरी हुई, दूसरा पुरुष अंतर्ध्यान हो गया । पति-पत्नी सकुशल अपने घर पहुंच गए। उस दिन के बाद से पति-पत्नी नियमपूर्वक बुध त्रयोदशी प्रदोष का व्रत रखने लगे। अत: बुध त्रयोदशी व्रत हर मनुष्य को करना चाहिए।
शिव जी की आरती (Shiv Aarti):
जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥
ॐ जय शिव…॥ एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥
ॐ जय शिव…॥ दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥
ॐ जय शिव…॥ अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी । चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव…॥ श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे । सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव…॥ कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता । जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका । प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव…॥ काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी । नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव…॥ त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे । कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव