29 जुलाई 2026 का पंचांग: श्रावण पूर्णिमा, शुभ मुहूर्त, राहुकाल, नक्षत्र, योग, पूजा विधि और बुधवार के उपाय
29 जुलाई 2026 का पंचांग पढ़ें। जानें श्रावण पूर्णिमा की तिथि, शुभ मुहूर्त, राहुकाल, नक्षत्र, योग, करण, सूर्योदय-सूर्यास्त, धार्मिक महत्व और बुधवार के प्रभावी उपाय।
29 जुलाई 2026 का पंचांग (बुधवार)
पंचांग विवरण
दिन: बुधवार
तिथि: श्रावण पूर्णिमा
पक्ष: शुक्ल पक्ष
मास: श्रावण मास
विक्रम संवत: 2083
सूर्य राशि: कर्क
चंद्र राशि: मकर
ऋतु: वर्षा ऋतु
सूर्योदय: प्रातः 05:44 बजे
सूर्यास्त: सायं 07:34 बजे
तिथि
श्रावण पूर्णिमा
श्रावण पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व है। इस दिन रक्षा बंधन, श्रावणी उपाकर्म, यज्ञोपवीत संस्कार और भगवान विष्णु, भगवान शिव तथा चंद्र देव की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। पूर्णिमा तिथि पर स्नान, दान, जप, तप और व्रत करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र सफलता, नेतृत्व, प्रतिष्ठा और स्थायी उपलब्धियों का प्रतीक माना जाता है। इस नक्षत्र में शिक्षा, धार्मिक कार्य, व्यापार और नए संकल्प लेना शुभ माना जाता है।
योग
सौभाग्य योग
सौभाग्य योग शुभ कार्यों, मांगलिक कार्यक्रमों, निवेश, व्यापार और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। इस योग में किए गए कार्यों में सफलता और शुभ फल प्राप्त होने की मान्यता है।
करण
बव करण
बालव करण
दोनों करण पूजा-पाठ, दान, यात्रा, व्यापार और नए कार्यों की शुरुआत के लिए शुभ माने जाते हैं।
शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:04 बजे से 12:56 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:47 बजे से 03:43 बजे तक
अमृत काल: प्रातः 08:55 बजे से 10:30 बजे तक
अशुभ समय
राहुकाल: दोपहर 12:00 बजे से 01:30 बजे तक
यमगण्ड काल: प्रातः 07:30 बजे से 09:00 बजे तक
गुलिक काल: प्रातः 10:30 बजे से 12:00 बजे तक
धार्मिक महत्व
श्रावण पूर्णिमा के दिन भगवान शिव, भगवान विष्णु और चंद्र देव की पूजा करने का विशेष महत्व है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उसकी लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। साथ ही ब्राह्मणों द्वारा यज्ञोपवीत बदलने की परंपरा भी निभाई जाती है। पूर्णिमा पर चंद्रमा को अर्घ्य देने और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र एवं धन का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
बुधवार के उपाय
भगवान शिव का गंगाजल और दूध से अभिषेक करें।
भगवान विष्णु और श्रीगणेश की पूजा करें।
चंद्र देव को दूध मिश्रित जल से अर्घ्य दें।
"ॐ नमः शिवाय", "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" और "ॐ गं गणपतये नमः" मंत्रों का जाप करें।
जरूरतमंदों को चावल, दूध, सफेद मिठाई और हरे वस्त्र का दान करें।
रक्षा बंधन के अवसर पर भाई-बहन एक-दूसरे के सुख, समृद्धि और दीर्घायु की कामना करें।