23 सितंबर 2026 का पंचांग: जानें तिथि, नक्षत्र, योग, राहुकाल और शुभ मुहूर्त

23 September 2026 Panchang: 23 सितंबर 2026, बुधवार को शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि रहेगी। द्वादशी तिथि रात करीब 10:51 बजे तक रहेगी, इसके बाद त्रयोदशी तिथि शुरू होगी। सुबह करीब 9:09 बजे तक श्रवण नक्षत्र रहेगा, इसके बाद धनिष्ठा नक्षत्र शुरू होगा। वहीं सुकर्मा योग शाम करीब 4:27 बजे तक रहेगा।

23 सितंबर 2026 का पंचांग

दिन: बुधवार

तिथि: शुक्ल पक्ष द्वादशी, रात 10:51 बजे तक

इसके बाद: शुक्ल पक्ष त्रयोदशी

माह: भाद्रपद

पक्ष: शुक्ल पक्ष

नक्षत्र: श्रवण, सुबह 9:09 बजे तक; इसके बाद धनिष्ठा

योग: सुकर्मा, शाम 4:27 बजे तक; इसके बाद धृति

करण: बव, सुबह करीब 10:22 बजे तक; इसके बाद बालव

चंद्र राशि: मकर

सूर्य राशि: कन्या

वार: बुधवार

विक्रम संवत: 2083

पंचांग के अनुसार 23 सितंबर को नई दिल्ली में सूर्योदय करीब 6:09 बजे और सूर्यास्त करीब 6:16-6:17 बजे होगा। चंद्रोदय लगभग 4:20-4:22 बजे और चंद्रास्त 24 सितंबर की सुबह करीब 3:39 बजे होगा।

23 सितंबर को द्वादशी तिथि

23 सितंबर को शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि रहेगी। धार्मिक मान्यताओं में द्वादशी तिथि को भगवान विष्णु की पूजा और एकादशी व्रत के पारण से जोड़ा जाता है। जो लोग 22 सितंबर को परिवर्तिनी एकादशी का व्रत रखते हैं, वे अपने क्षेत्र और परंपरा के अनुसार द्वादशी के पारण समय का ध्यान रखें।

इस दिन भगवान विष्णु को तुलसी दल, पीले फूल और फल अर्पित करके पूजा की जा सकती है। जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करना भी शुभ माना जाता है।

23 सितंबर का राहुकाल

बुधवार को राहुकाल दोपहर के समय रहेगा।

राहुकाल: दोपहर 12:13 बजे से 1:44 बजे तक

इस दौरान नए शुभ कार्य की शुरुआत करने से बचने की धार्मिक मान्यता है।

अन्य अशुभ समय

यमगंड: सुबह 7:40 बजे से 9:11 बजे तक

गुलिक काल: सुबह 10:42 बजे से दोपहर 12:13 बजे तक

इन समयों में भी महत्वपूर्ण शुभ कार्य शुरू करने से बचने की परंपरा है।

23 सितंबर 2026 के शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह करीब 4:35 बजे से 5:22 बजे तक

विजय मुहूर्त: दोपहर करीब 2:14 बजे से 3:03 बजे तक

गोधूलि मुहूर्त: शाम करीब 6:15 बजे से 6:41 बजे तक

निशिता मुहूर्त: रात करीब 11:50 बजे से 12:37 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त: करीब 11:49 बजे से 12:37 बजे तक बताया गया है, लेकिन बुधवार को इसे लेकर अलग-अलग पंचांग परंपराओं में मतभेद मिलते हैं। इसलिए किसी विशेष शुभ कार्य के लिए स्थानीय परंपरा के अनुसार मुहूर्त देखना बेहतर है।

23 सितंबर को क्या करें?

द्वादशी के दिन सुबह स्नान करके भगवान विष्णु की पूजा करें। भगवान को तुलसी दल, पीले फूल, फल और पंचामृत अर्पित कर सकते हैं। विष्णु मंत्र का जाप करें और जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन या वस्त्र का दान करें।

बुधवार होने के कारण भगवान गणेश की पूजा भी की जा सकती है। गणेश जी को दूर्वा अर्पित करके बुद्धि, एकाग्रता और कार्यों में सफलता की प्रार्थना करना धार्मिक रूप से शुभ माना जाता है।

23 सितंबर को क्या न करें?

इस दिन क्रोध, विवाद और अनावश्यक वाद-विवाद से बचना चाहिए। आर्थिक मामलों में बिना सोचे-समझे बड़ा फैसला लेने से बचें। राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल में नए शुभ कार्य शुरू न करने की धार्मिक मान्यता है।

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