20 नवंबर 2025 का पंचांग: शुभ मुहूर्त और तिथि‑नक्षत्र जानकारी

20 नवंबर 2025, गुरुवार, उज्जैन के लिए आज का पंचांग और शुभ मुहूर्त जानें। यह गाइड आपको दिन की शुरुआत सही समय पर करने, महत्वपूर्ण कार्य करने और पुण्य कर्मों के लिए मदद करेगा।

सूर्योदय और सूर्यास्त

सूर्योदय: 6:48 AM

सूर्यास्त: 5:36 PM

चंद्रोदय: 6:40 AM

चंद्रास्त: 5:31 PM

सुबह जल्दी उठकर दिन की शुरुआत करना शुभ माना जाता है।

पंचांग विवरण

आयन: दक्षिणायण

ऋतु: हेमंत (प्रारम्भ‑शीत)

विक्रम संवत: 2082

शके संवत: 1947

पूर्णिमांत माह: मार्गशीर्ष

आमांत माह: कार्तिक

तिथि, नक्षत्र, योग और करण

तिथि:

कृष्ण‑पक्ष अमावस्या – 19 नवंबर 09:43 AM से 20 नवंबर 12:17 PM

शुक्ल‑पक्ष प्रतिपदा – 20 नवंबर 12:17 PM से 21 नवंबर 02:47 PM

नक्षत्र:

विशाखा – 19 नवंबर 07:59 AM से 20 नवंबर 10:58 AM

अनुराधा – 20 नवंबर 10:58 AM से 21 नवंबर 01:55 PM

करण:

नाग – 19 नवंबर 11:00 PM से 20 नवंबर 12:17 PM

किस्तुघ्न (Kimstughna) – 20 नवंबर 12:17 PM से 21 नवंबर 01:33 AM

योग:

शोभना – 19 नवंबर 09:00 AM से 20 नवंबर 09:52 AM

अतिगण्ड – 20 नवंबर 09:52 AM से 21 नवंबर 10:43 AM

अमावस्या और प्रतिपदा दोनों तिथियाँ धार्मिक और पुण्य कर्मों के लिए शुभ मानी जाती हैं।

शुभ और अशुभ समय

समय विवरण

2:14 PM – 4:02 PM अमृत काल – सबसे शुभ समय

5:12 AM – 6:00 AM ब्रह्म मुहूर्त – ध्यान, साधना के लिए उत्तम

6:48 AM – 8:09 AM यमगण्ड काल – नए काम के लिए असुविधाजनक

9:30 AM – 10:51 AM गुलिक काल – नए कार्य टालें

10:24 AM – 11:07 AM, 2:43 PM – 3:27 PM दुर्मुहूर्त – शुभ कार्य के लिए अशुभ

1:33 PM – 2:54 PM राहु काल – नए काम के लिए अनुकूल नहीं

3:28 PM – 5:16 PM वर्ज्यम् – पूजा/महत्वपूर्ण काम टालें

सबसे शुभ समय: अमृत काल और ब्रह्म मुहूर्त

राशि और चंद्र राशि

सूर्य राशि: वृश्चिक

चंद्र राशि: वृश्चिक

सूर्य और चंद्र का प्रभाव दिनभर आपकी ऊर्जा और मानसिक स्थिति को प्रभावित करेगा।

 विशेष महत्व

आज गौरी तपो व्रत और अमावस्या का दिन है।

अमावस्या तिथि और शुभ‑अशुभ मुहूर्तों के अनुसार ध्यान, पूजा और पुण्य कर्म करना लाभकारी है।

ब्रह्म मुहूर्त (सुबह जल्दी) और अमृत काल (दोपहर बाद) में किए गए कार्य विशेष फलदायक माने जाते हैं।

यह दिन आध्यात्मिक साधना, व्रत, दान और धार्मिक कार्यों के लिए उत्तम है।

20 नवंबर 2025 का दिन पंचांग और शुभ मुहूर्त के अनुसार धार्मिक, आध्यात्मिक और सकारात्मक कार्यों के लिए आदर्श है।

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