17 October 2026 Panchang: 17 अक्टूबर 2026, शनिवार को आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि है। इस दिन मूल नक्षत्र और अतिगण्ड योग रहेगा। शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। शनिवार होने के कारण भगवान शनिदेव और हनुमान जी की पूजा का भी विशेष महत्व है। आइए जानते हैं दिल्ली के अनुसार आज का पंचांग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और पूजा विधि।

17 अक्टूबर 2026 का पंचांग

दिन: शनिवार

मास: आश्विन

पक्ष: शुक्ल पक्ष

तिथि: सप्तमी, 18 अक्टूबर की सुबह लगभग 8:28 बजे तक

नक्षत्र: मूल, सुबह लगभग 9:47 बजे तक; इसके बाद पूर्वाषाढ़ा

योग: अतिगण्ड, रात लगभग 11:03 बजे तक

करण: गर, शाम लगभग 7:11 बजे तक

विक्रम संवत: 2083

शक संवत: 1948

चंद्र राशि: धनु

सूर्य राशि: कन्या

सूर्योदय: सुबह 6:23 बजे

सूर्यास्त: शाम 5:50 बजे

चंद्रोदय: दोपहर लगभग 12:27 बजे

चंद्रास्त: रात लगभग 10:31 बजे।

17 अक्टूबर 2026 के शुभ मुहूर्त

दिल्ली के समय के अनुसार शनिवार के प्रमुख शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:42 बजे से 5:32 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:29 बजे तक

विजय मुहूर्त: दोपहर 2:06 बजे से 2:48 बजे तक

गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:25 बजे से 6:13 बजे तक

अमृत काल: दोपहर लगभग 2:58 बजे से 4:23 बजे तक।

17 अक्टूबर 2026 को राहुकाल का समय

राहुकाल: सुबह 9:14 बजे से 10:40 बजे तक

यमगण्ड: दोपहर 1:32 बजे से 2:58 बजे तक

गुलिक काल: सुबह 6:23 बजे से 7:49 बजे तक।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राहुकाल में नए शुभ कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। नियमित पूजा-पाठ और दैनिक धार्मिक कार्य अपनी परंपरा के अनुसार किए जा सकते हैं।

नवरात्रि का सातवां दिन: मां कालरात्रि की पूजा

17 अक्टूबर को शारदीय नवरात्रि का सातवां दिन है। इस दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। मां कालरात्रि को साहस, शक्ति और नकारात्मक शक्तियों के नाश का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि उनकी आराधना से भय दूर करने और जीवन में आने वाली बाधाओं का सामना करने की शक्ति मिलती है।

मां कालरात्रि की पूजा विधि

सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल की सफाई करें।

मां कालरात्रि की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं।

मां को फूल, अक्षत और गुड़ से बनी मिठाई का भोग अर्पित करें।

दुर्गा चालीसा या मां कालरात्रि के मंत्र का जाप करें।

अंत में मां की आरती करके परिवार की सुख-शांति और सुरक्षा की प्रार्थना करें।

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