सावन शिवरात्रि 2026: 11 या 12 अगस्त? जानें सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त, चार प्रहर पूजा समय और व्रत नियम

Sawan Shivratri 2026 कब है? जानें 11 या 12 अगस्त में सही तिथि, सावन शिवरात्रि पूजा मुहूर्त, चार प्रहर पूजा समय, व्रत नियम, पूजा-विधि और भगवान शिव की आराधना का धार्मिक महत्व।

Published On 2026-07-29 16:37 GMT   |   Update On 2026-07-29 16:37 GMT

सावन शिवरात्रि 2026: 11 या 12 अगस्त? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा-विधि, व्रत नियम और महत्व

सावन शिवरात्रि भगवान शिव की आराधना के लिए सावन महीने का सबसे महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। वर्ष 2026 में तिथि को लेकर लोगों के बीच भ्रम की स्थिति है, लेकिन उदयातिथि और प्रचलित उत्तर भारतीय पंचांग के अनुसार सावन शिवरात्रि 11 अगस्त 2026 (मंगलवार) को मनाई जाएगी।

कब है सावन की शिवरात्रि

सावन शिवरात्रि सावन कृष्ण चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। पंचांग के अनुसार, इस बार चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त को सुबह 04:53 बजे आरंभ होगी। और 12 अगस्त को देर रात 1:51 बजे खत्म होगी। वहीं इस दिन रात्रि के चारों प्रहर भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसे में श्रद्धालुओं को यह अवसर सिर्फ 11 अगस्त को ही मिल पाएगा। इसलिए सावन माह की शिवरात्रि 11 अगस्त को मनाना ही उचित होगा।

चार प्रहर की पूजा का समय

प्रथम प्रहर की पूजा- शाम 07:04 बजे से रात 09:45 बजे तक

द्वितीय प्रहर की पूजा- रात 09:45 बजे से रात 12:26 बजे तक 

तृतीय प्रहर की पूजा- रात 12:26 बजे से सुबह 03:07 बजे तक

चतुर्थ प्रहर की पूजा- सुबह 03:07 बजे से सुबह 05:49 बजे तक

सावन शिवरात्रि का धार्मिक महत्व

सावन शिवरात्रि का धार्मिक महत्व अत्यंत विशेष माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सावन मास में भगवान शिव की उपासना करने से भक्तों पर उनकी विशेष कृपा बरसती है। इस दिन व्रत रखने और रात्रि जागरण के साथ “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करने से पापों का क्षय होता है। साथ ही मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। वहीं अविवाहित युवक-युवतियां मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना से इस दिन व्रत रखते हैं, जबकि विवाहित दंपति वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और दीर्घायु के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करते हैं।

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