सावन 2026: बेलपत्र का धार्मिक महत्व, शिवपुराण में बताए गए उपाय और भगवान शिव की कृपा पाने के आसान तरीके

Sawan 2026: जानें बेलपत्र का धार्मिक महत्व, शिवपुराण में बताए गए बेलपत्र के उपाय, बेल के पेड़ पर जल चढ़ाने का महत्व, दान के नियम और भगवान शिव की कृपा पाने के सरल उपाय।

Published On 2026-07-31 17:28 GMT   |   Update On 2026-07-31 17:28 GMT

सावन 2026: शिव जी की आरती 'ॐ जय शिव ओंकारा' का महत्व, आरती करने का सही समय और पूजा विधि

सावन का महीना भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस पूरे माह में विशेष रूप से सावन सोमवार के दिन शिवलिंग का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, मंत्र जाप और 'ॐ जय शिव ओंकारा' आरती का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आरती के साथ शिव पूजा पूर्ण मानी जाती है और इससे भगवान भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होती है।

शिव जी की आरती ऊं शिव ओंकारा लिरिक्स

शिवपुराण में बेलपत्र के वृक्ष से संबंधित कुछ कामों के बारे में विस्तार से बताया गया है। इसमें बताया गया है कि इन कामों को करने से शिव जी अति प्रसन्न होते हैं और सुख-समृद्धि, धन-संपदा का आशीर्वाद देते हैं। आइए जानते हैं सावन माह के दौरान बेलपत्र के वृक्ष से संबंधित कौन से उपाय करना अत्यंत शुभ हो सकता है…

बेलपत्र का धार्मिक महत्व (Significance Of Bel Patra)

शिवपुराण, पद्म पुराण से लेकर देवी भागवत पुराण में बेलपत्र के महत्व के बारे में विस्तार से बताया गया है। शिवपुराण में बेलपत्र के वृक्ष को स्वयं महादेव का स्वरूप माना गया है। इस पेड़ की पूजा-अर्चना करने के साथ आराधना करने से शिव जी अति प्रसन्न होते हैं और सुख-समृद्धि, धन-संपदा की प्राप्ति हो सकती है। आइए जानते हैं किस पुराण में बेलपत्र के पेड़ के बारे में क्या-क्या लिखा है।

शिवपुराण के विश्वेश्वर संहिता के अध्याय 22 में बेलपत्र के वृक्ष को शिव जी का ही स्वरूप माना गया है। जिनकी स्तुति देवताओं के द्वारा भी की जाती है। इनकी महिमा को पूर्ण रूप से जान पाना काफी कठिन है।

बेलपत्र के पेड़ से जुड़े करें ये उपाय (Belpatra Upay On Sawan)

शिव पुराण विश्वेश्वर संहिता में बेलपत्र के वृक्ष से संबंधित कुछ कामों में बारे में बताया । इन्हें करने से शिव जी अति प्रसन्न होते हैं और सुख-समृद्धि, धन-संपदा मिलने के साथ पापों से मुक्ति मिल जाती है। बिल्व अर्थात बेल का वृक्ष महादेव का रूप है। देवताओं द्वारा इसकी स्तुति की गई है। तीनों लोकों में स्थित सभी तीर्थ बिल्व में ही निवास करते हैं क्योंकि इसकी जड़ में लिंग रूपी महादेव जी का वास होता है। जो इसकी पूजा करता है, वह निश्चय ही शिवपद प्राप्त करता है ।

बेलपत्र के वृक्ष पर चढ़ाएं जल

जो मनुष्य बिल्व की जड़ के पास अपने मस्तक को जल से सींचता है, उसे संपूर्ण तीर्थ स्थलों पर स्नान का फल प्राप्त होता है।

बिल्व की जड़ों को पूरा पानी से भरा देखकर भगवान शिव संतुष्ट एवं प्रसन्न होते हैं। इसलिए सावन माह के दौरान आप भी बेलपत्र में जल अर्पित करें। इससे शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है।

बेलपत्र के पेड़ के नीचे ब्राह्मण को भोजन

जो भी व्यक्ति एक शिवभक्त ब्राह्मण को बेलपत्र के वृक्ष के नीचे भोजन कराता है, तो वह एक करोड़ ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर फलों को पाता है।

बेलपत्र के नीचे करें इन चीजों का दान

सावन माह के दौरान शिव जी की पूजा करने के साथ बेलपत्र के वृक्ष के नीचे दूध, घी या फिर पके अन्न आदि का दान करता है,तो वह व्यक्ति हर तरह की दरिद्रता से दूर हो जाता है।

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