Pradosh Vrat November 2026: नवंबर में कब-कब रखा जाएगा प्रदोष व्रत? जानें रवि प्रदोष की सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Pradosh Vrat November 2026 Date and Shubh Muhurat: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है। हर महीने कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।

नवंबर 2026 में दो प्रदोष व्रत पड़ने वाले हैं। पहला प्रदोष व्रत 6 नवंबर, शुक्रवार को और दूसरा 22 नवंबर, रविवार को रखा जाएगा। रविवार के दिन पड़ने के कारण दूसरे प्रदोष को रवि प्रदोष व्रत कहा जाएगा। आइए जानते हैं दोनों प्रदोष व्रतों की सही तारीख, त्रयोदशी तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और भगवान शिव की पूजा विधि।

नवंबर 2026 में प्रदोष व्रत कब-कब हैं?

हिंदू पंचांग के अनुसार, नवंबर महीने में दो प्रदोष व्रत रखे जाएंगे।

पहला प्रदोष व्रत: 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर शुक्र प्रदोष व्रत रखा जाएगा।

दूसरा प्रदोष व्रत: 22 नवंबर 2026, रविवार को शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर रवि प्रदोष व्रत रखा जाएगा।

प्रदोष व्रत में शाम के समय भगवान शिव की पूजा करने का विशेष महत्व माना जाता है। इसी कारण व्रत की तारीख निर्धारित करते समय प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि का होना महत्वपूर्ण होता है।

शुक्र प्रदोष व्रत 2026 कब है? (Shukra Pradosh Vrat 2026)

नवंबर महीने का पहला प्रदोष व्रत 6 नवंबर, शुक्रवार को रखा जाएगा। शुक्रवार के दिन पड़ने के कारण इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है।

पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10 बजकर 30 मिनट से शुरू होगी और 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट पर समाप्त होगी।

शुक्र प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त

- व्रत की तारीख: 6 नवंबर 2026, शुक्रवार

- त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: सुबह 10:30 बजे

- त्रयोदशी तिथि समाप्त: 7 नवंबर, सुबह 10:47 बजे

- प्रदोष काल में पूजा का समय: शाम लगभग 5:33 बजे से रात 8:09 बजे तक

यह समय दिल्ली के लिए अनुमानित है। अलग-अलग शहरों में सूर्यास्त के अनुसार पूजा का समय बदल सकता है।

रवि प्रदोष व्रत 2026 कब है? (Ravi Pradosh Vrat 2026)

नवंबर महीने का दूसरा प्रदोष व्रत 22 नवंबर, रविवार को रखा जाएगा। रविवार को पड़ने के कारण इसे रवि प्रदोष व्रत कहा जाता है।

पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 22 नवंबर को सुबह 4 बजकर 56 मिनट से शुरू होगी और 23 नवंबर को रात 2 बजकर 36 मिनट पर समाप्त होगी।

प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि रहने के कारण रवि प्रदोष व्रत 22 नवंबर 2026 को रखा जाएगा।

रवि प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त

- व्रत की तारीख: 22 नवंबर 2026, रविवार

- त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: सुबह 4:56 बजे

- त्रयोदशी तिथि समाप्त: 23 नवंबर, रात 2:36 बजे

- प्रदोष काल में पूजा का समय: शाम लगभग 5:25 बजे से रात 8:06 बजे तक

दिल्ली में प्रदोष काल का यह अनुमानित समय है। अपने शहर के अनुसार स्थानीय पंचांग से पूजा का समय देखना उचित रहेगा।

रवि प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर माना जाता है। रविवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को रवि प्रदोष कहा जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रवि प्रदोष व्रत रखने से व्यक्ति अच्छे स्वास्थ्य, लंबी आयु और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करता है।

इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के साथ सूर्य देव का स्मरण करना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक व्रत रखने से मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मकता आती है।

प्रदोष व्रत की पूजा सामग्री (Pradosh Vrat Puja Samagri)

प्रदोष व्रत की पूजा के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की तस्वीर, शिवलिंग, जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी, बेलपत्र, सफेद फूल, चंदन, अक्षत, धूप, दीपक, फल और मिठाई रख सकते हैं।

इसके अलावा पूजा के लिए साफ आसन और प्रसाद की व्यवस्था करें। पूजा सामग्री परिवार की परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

प्रदोष व्रत की पूजा विधि (Pradosh Vrat Puja Vidhi)

प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। इस व्रत में शाम का समय विशेष माना जाता है।

1. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।

2. भगवान शिव का ध्यान करते हुए प्रदोष व्रत का संकल्प लें।

3. दिनभर अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखें और सात्विक आहार के नियमों का पालन करें।

4. शाम को प्रदोष काल शुरू होने से पहले पूजा स्थल की सफाई करें।

5. शिवलिंग पर जल या गंगाजल अर्पित करें।

6. भगवान शिव को बेलपत्र, सफेद फूल, चंदन और फल चढ़ाएं।

7. माता पार्वती की पूजा करें और धूप-दीप जलाएं।

8. भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें और प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें या सुनें।

9. अंत में भगवान शिव की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें

पूजा के बाद प्रसाद बांटें। खोलने की विधि अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार अपनाएं।

प्रदोष व्रत पर करें इन मंत्रों का जाप

प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव के मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है।

भगवान शिव का पंचाक्षरी मंत्र

ॐ नमः शिवाय॥

महामृत्युंजय मंत्र

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।

उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

शिव गायत्री मंत्र

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि।

तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥

धार्मिक मान्यता है कि इन मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करने से मन को शांति मिलती है और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।

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