Maa Shailputri Aarti 2026: शैलपुत्री मां बैल सवार आरती, मंत्र और पूजा विधि

Maa Shailputri Aarti in Hindi: शारदीय नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। मां शैलपुत्री को पर्वतराज हिमालय की पुत्री और भगवान शिव की अर्धांगिनी पार्वती का स्वरूप माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां शैलपुत्री का वाहन बैल है और उनके एक हाथ में त्रिशूल तथा दूसरे हाथ में कमल सुशोभित होता है।

नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा के बाद उनकी आरती करने की परंपरा है। ‘शैलपुत्री मां बैल सवार, करें देवता जय जयकार’ आरती में माता की महिमा का गुणगान किया जाता है। भक्त आरती के माध्यम से मां से सुख-शांति, समृद्धि और जीवन में आने वाली कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति देने की प्रार्थना करते हैं।

मां शैलपुत्री की आरती का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां शैलपुत्री की आरती करने से भक्तों को मानसिक शांति और आध्यात्मिक संबल मिलता है। आरती के दौरान दीपक जलाकर माता के सामने श्रद्धा व्यक्त की जाती है और परिवार की खुशहाली की कामना की जाती है।

मां शैलपुत्री की आरती का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां शैलपुत्री की आरती करने से भक्तों को मानसिक शांति और आध्यात्मिक संबल मिलता है। आरती के दौरान दीपक जलाकर माता के सामने श्रद्धा व्यक्त की जाती है और परिवार की खुशहाली की कामना की जाती है।

आरती का भाव माता के प्रति प्रेम, विश्वास और समर्पण को दर्शाता है। भक्त उनसे जीवन में सही मार्ग पर चलने, साहस बनाए रखने और परिवार में सुख-शांति की प्रार्थना करते हैं।

मां शैलपुत्री की आरती का भाव

मां शैलपुत्री की आरती में उन्हें भगवान शिव की प्रिय भवानी, पार्वती और उमा के रूप में नमन किया जाता है। इसमें भक्त माता की महिमा का वर्णन करते हुए उनसे दुख दूर करने और मनोकामनाएं पूर्ण करने की प्रार्थना करता है।

आरती में घी का दीपक जलाने, नारियल का भोग लगाने और श्रद्धा से शीश झुकाने की भावना भी व्यक्त होती है। भक्त इसे मां के प्रति अपनी आस्था प्रकट करने का माध्यम मानते हैं।

शारदीय नवरात्रि के पहले दिन पढ़ें ये मंत्र (Maa Shailputri Mantra) 

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

शिवरूपा वृष वहिनी हिमकन्या शुभंगिनी पद्म त्रिशूल हस्त धारिणी रत्नयुक्त कल्याणकारिणी

ओम् ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नम: बीज मंत्र- ह्रीं शिवायै नम: वन्दे वांच्छित लाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम् वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्

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