कामदा एकादशी 2026: सही तारीख, व्रत का दिन, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पारण समय जानें

कामदा एकादशी 2026 कब है? जानें 28 या 29 मार्च में से किस दिन व्रत रखा जाएगा, सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पारण समय। हिंदू धर्म में कामदा एकादशी का विशेष महत्व है, जिसे भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। इस दिन व्रत, पूजा और दान करने से सभी पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस लेख में पढ़ें कामदा एकादशी 2026 की पूरी जानकारी, व्रत रखने का सही तरीका और पारण का शुभ समय।

Published On 2026-03-27 16:08 GMT   |   Update On 2026-03-27 16:08 GMT

कामदा एकादशी 2026: सही तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पारण समय जानें

Kamada Ekadashi 2026 Date & Time:हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है, और चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को कामदा एकादशी कहा जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और मान्यता है कि इसे करने से सभी पापों का नाश होता है तथा मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

अगर आप भी जानना चाहते हैं कि 2026 में कामदा एकादशी कब है, व्रत किस दिन रखा जाएगा और पारण का सही समय क्या है, तो यह लेख आपके लिए है।

इस बार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि दो दिन होने के कारण एकादशी तिथि को लेकर असमंसज है। जानें 28 या फिर 29 मार्च किस दिन मनाई जाएगी कामदा एकादशी…

कामदा एकादशी 2026 कब है? (Kamada Ekadashi 2026 Date)

द्रिक पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 28 मार्च की सुबह 8 बजकर 45 मिनट से आरंभ हो रही है, जो 29 मार्च की सुबह 7 बजकर 46 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में कामदा एकादशी का व्रत 29 मार्च 2026 को होगा।

कामदा एकादशी 2026 पारण समय

पारण तिथि: 30 मार्च 2026 (सोमवार)

पारण का शुभ समय: सुबह लगभग 06:14 बजे से 07:09 बजे तक

व्रत का पारण द्वादशी तिथि में ही करना शुभ माना जाता है।

कामदा एकादशी 2026 पूजा विधि (Kamda Ekadashi 2026 Puja Vidhi)

कामदा एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान कर लें। इसके बाद साफ-सुथरे वस्त्र धारण कर लें। फिर एक तांबे के लोटे में जल, सिंदूर, अक्षत, लाल फूल जालकर सूर्य को अर्घ्य करें। फिर विष्णु जी की पूजा आरंभ करें। सबसे पहले हाथ में फूल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान विष्णु को पीला चंदन, फूल, माला, भोग, आदि चढ़ाने के बाद घी का दीपक जलाकर मंत्र, व्रत कथा, स्तुति, विष्णु चालीसा का पाठ करने के बाद अंत में आरती अवश्य कर लें।

श्री विष्णु स्तुति (Vishnu Stuti) शांताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं, विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकांतं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्, वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्

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