Kalashtami Vrat 2026: 3 या 4 अक्टूबर कब है कालाष्टमी? जानें पूजा मुहूर्त, मंत्र और धार्मिक महत्व

Kalashtami Vrat 2026: हिंदू धर्म में कालाष्टमी का व्रत भगवान शिव के रौद्र स्वरूप काल भैरव को समर्पित माना जाता है। हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाने की परंपरा है। इस दिन भक्त भगवान काल भैरव की पूजा, मंत्र जाप और उपवास करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार काल भैरव की उपासना से भय और नकारात्मकता से मुक्ति तथा जीवन में सुरक्षा और शांति की कामना की जाती है।

कालाष्टमी व्रत 2026 कब है?

अक्टूबर 2026 में कालाष्टमी व्रत को लेकर 3 या 4 अक्टूबर की तारीख को लेकर भ्रम हो सकता है। पंचांग के अनुसार कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर 2026 को सुबह 8:00 बजे शुरू होगी और 4 अक्टूबर को सुबह 5:52 बजे समाप्त होगी।

चूंकि कालाष्टमी की पूजा शाम के समय करने की परंपरा बताई गई है, इसलिए कालाष्टमी व्रत 3 अक्टूबर, शनिवार को रखा जाएगा।

कालाष्टमी 2026 की मुख्य जानकारी

व्रत की तारीख: 3 अक्टूबर 2026, शनिवार

अष्टमी तिथि शुरू: 3 अक्टूबर, सुबह 8:00 बजे

अष्टमी तिथि समाप्त: 4 अक्टूबर, सुबह 5:52 बजे

आराध्य देव: भगवान काल भैरव

पक्ष: कृष्ण पक्ष

तिथि: अष्टमी

कालाष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त

जनसत्ता में दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार, 3 अक्टूबर को काल भैरव की पूजा के लिए शाम 6:05 बजे से 6:29 बजे तक का समय बताया गया है। भक्त इस अवधि में भगवान काल भैरव की पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

पूजा के लिए घर के पूजा स्थान को साफ करके दीपक जलाएं। इसके बाद भगवान शिव और काल भैरव का ध्यान कर धूप-दीप, फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें।

कालाष्टमी पर काल भैरव को क्या चढ़ाएं?

धार्मिक परंपरा में काल भैरव की पूजा में कई भक्त काले तिल, सरसों का तेल, फूल, धूप और दीपक अर्पित करते हैं। पूजा करते समय श्रद्धा के साथ काल भैरव का ध्यान और मंत्र जाप किया जाता है।

इस दिन भगवान काल भैरव के वाहन माने जाने वाले कुत्ते को भोजन कराने की भी परंपरा है। इसे धार्मिक मान्यता के अनुसार शुभ माना जाता है।

कालाष्टमी के दिन करें इन मंत्रों का जाप

कालाष्टमी पर भगवान काल भैरव की आराधना के दौरान इन मंत्रों का जाप किया जाता है:

ॐ कालभैरवाय नमः।

ॐ भयहरणं च भैरवः।

मंत्र जाप के दौरान मन को शांत रखते हुए भगवान काल भैरव का ध्यान करने की परंपरा है।

कालाष्टमी व्रत का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान काल भैरव को भगवान शिव का उग्र स्वरूप और काशी का रक्षक माना जाता है। कालाष्टमी के दिन उनकी पूजा करने से भय, नकारात्मकता और जीवन की परेशानियों से रक्षा मिलने की मान्यता है।

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