Jitiya Vrat 2026 Puja Samagri: जितिया व्रत की पूजा में क्या-क्या चाहिए? यहां देखें पूरी सामग्री लिस्ट

Jitiya Vrat 2026 Puja Samagri: जितिया व्रत यानी जीवित्पुत्रिका व्रत हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण व्रतों में से एक माना जाता है। इस व्रत को माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन निर्जला व्रत रखने के साथ भगवान जीमूतवाहन की पूजा की जाती है।

साल 2026 में जितिया व्रत 3 अक्टूबर, शनिवार को रखा जाएगा। इसकी शुरुआत 2 अक्टूबर को नहाय-खाय से होगी और 4 अक्टूबर को पारण के साथ व्रत पूरा होगा।

अगर आप भी इस साल जितिया व्रत रखने वाली हैं तो पूजा से पहले सभी सामग्री की लिस्ट तैयार कर लेना बेहतर रहेगा। आइए जानते हैं जितिया व्रत की संपूर्ण पूजा सामग्री।

जितिया व्रत 2026 की पूजा सामग्री

जितिया पूजा के लिए क्षेत्र और परिवार की परंपरा के अनुसार सामग्री में थोड़ा अंतर हो सकता है। सामान्य तौर पर इन चीजों को पूजा में शामिल किया जाता है:

भगवान जीमूतवाहन की प्रतिमा या तस्वीर

जीमूतवाहन की प्रतिमा बनाने के लिए कुश या दूर्वा

चील और सियारिन की आकृति बनाने के लिए मिट्टी या गोबर

पूजा की चौकी

लाल या पीले रंग का कपड़ा

कलश

आम के पत्ते

नारियल

रोली और सिंदूर

हल्दी

अक्षत यानी चावल

मौली या कलावा

फूल और फूलों की माला

दूर्वा घास

धूप और अगरबत्ती

मिट्टी या पीतल का दीपक

रूई की बत्ती

घी या सरसों का तेल

कपूर

पंचामृत के लिए दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल

फल

मिठाई और नैवेद्य

पान और सुपारी

लौंग और इलायची

पूजा की थाली

लोटा

जितिया व्रत का धागा या व्रत चिन्ह

दक्षिणा के लिए पैसे स्थानीय परंपरा के हिसाब से पूजा में कुछ विशेष फल, प्रसाद या अन्य सामग्री भी शामिल की जा सकती है।

जीमूतवाहन की पूजा में किन चीजों का महत्व है?

जितिया व्रत में भगवान जीमूतवाहन की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। कई स्थानों पर उनकी प्रतिमा कुश से बनाई जाती है। इसी तरह चील और सियारिन की आकृति बनाने की परंपरा भी कुछ क्षेत्रों में देखने को मिलती है।

पूजा में सिंदूर, अक्षत, फूल, धूप-दीप, नैवेद्य और फल आदि अर्पित किए जाते हैं। हालांकि पूजा की सामग्री और विधि परिवार तथा क्षेत्र की परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।

जितिया व्रत 2026 कब है?

आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर 2026 को सुबह करीब 7:59 बजे शुरू होगी और 4 अक्टूबर की सुबह करीब 5:51 बजे समाप्त होगी। प्रदोष काल में पूजा की परंपरा होने के कारण जितिया व्रत 3 अक्टूबर को रखा जाएगा।

जितिया व्रत की मुख्य तिथियां

नहाय-खाय: 2 अक्टूबर 2026

निर्जला जितिया व्रत और पूजा: 3 अक्टूबर 2026

व्रत पारण: 4 अक्टूबर 2026, सुबह 7:28 बजे के बाद

जितिया व्रत 2026 पूजा का शुभ समय

जनसत्ता के अनुसार 3 अक्टूबर को प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार हैं:

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:38 बजे से 5:26 बजे तक

प्रातः संध्या: सुबह 5:02 बजे से 6:15 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:46 बजे से दोपहर 12:34 बजे तक

प्रदोष काल: शाम के समय, सूर्यास्त के आसपास

निशिता मुहूर्त: रात 11:46 बजे से 12:35 बजे तक

प्रदोष काल में भगवान जीमूतवाहन की पूजा करने की परंपरा बताई गई है।

जितिया व्रत की पूजा के लिए ऐसे करें तैयारी

पूजा से एक दिन पहले सभी सामग्री को एक जगह व्यवस्थित कर लें। चौकी पर साफ कपड़ा बिछाएं और पूजा की आवश्यक सामग्री पास में रखें। कलश, दीपक, फूल, सिंदूर, अक्षत, धूप, नैवेद्य और अन्य सामग्री पहले से तैयार रखने से पूजा के समय किसी चीज की कमी नहीं होगी।

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