हरियाली अमावस्या 2026: कब है? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, वृक्षारोपण का महत्व और धार्मिक मान्यता

Hariyali Amavasya 2026 कब है? जानें 12 अगस्त 2026 की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा-विधि, हरियाली अमावस्या का धार्मिक महत्व, पितृ तर्पण, शिव पूजा और इस दिन वृक्षारोपण क्यों किया जाता है।

Published On 2026-07-29 16:40 GMT   |   Update On 2026-07-29 16:40 GMT

हरियाली अमावस्या 2026: जानें महत्व, इतिहास, पूजा विधि और इस दिन क्यों किया जाता है वृक्षारोपण

हरियाली अमावस्या सावन मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व है। यह पर्व प्रकृति, हरियाली और भगवान शिव की आराधना को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन स्नान, दान, पितृ तर्पण, शिव पूजा और वृक्षारोपण का विशेष महत्व होता है। वर्ष 2026 में हरियाली अमावस्या 12 अगस्त (बुधवार) को मनाई जाएगी।

हरियाली अमावस्या 2026 तारीख

वैदिक पंचांग के अनुसार सावन कृष्ण अमावस्या तिथि 12 अगस्त को 01 बजकर 53 ए एम से शुरू होगी। साथ ही यह अमावस्या तिथि 12 अगस्त को ही रात 11 बजकर 7 मिनट तक मान्य रहेगी। ऐसे में उदयातिथि के आधार पर हरियाली अमावस्या 12 अगस्त बुधवार को मनाई जाएगी।

हरियाली अमावस्या शुभ मुहूर्त

पंचांग के मुताबिक इस साल की हरियाली अमावस्या पर सुबह से ही शुभ मुहूर्त बने हुए हैं। सुबह में 05:37 ए एम से लेकर 07:21 ए एम तक चर-सामान्य मुहूर्त है, उसके बाद से लाभ-उन्नति मुहूर्त सुबह में ही 07:21 ए एम से लेकर सुबह 09:04 ए एम तक है। वहीं अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त 09:03 ए एम से लेकर 10:45 ए एम तक है। साथ ही दोपहर में शुभ-उत्तम मुहूर्त 12:27 पी एम से लेकर 02:10 पी एम तक रहेगा। इन मुहूर्तों में पूजा- अर्चना कर सकते हैं।

हरियाली अमावस्या का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और पीपल, बरगद तथा तुलसी जैसे पवित्र वृक्षों की पूजा करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। अमावस्या तिथि होने के कारण पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य का भी विशेष महत्व बताया गया है, जिससे पितृ दोष में कमी आने और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होने की मान्यता है।

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