Durga Ji Ki Aarti 2026: ॐ जय अम्बे गौरी और अम्बे तू है जगदम्बे काली का महत्व

Durga Ji Ki Aarti in Hindi: शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के साथ आरती करने का विशेष महत्व माना जाता है। इन नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं और सुबह-शाम दीपक जलाकर माता की आरती करते हैं। मां दुर्गा की सबसे लोकप्रिय आरतियों में ‘ॐ जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी’ और ‘अम्बे तू है जगदम्बे काली’ शामिल हैं।

इन आरतियों में मां दुर्गा की शक्ति, करुणा, महिमा और भक्तों पर उनकी कृपा का गुणगान किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, आरती के समय मां का स्मरण करने से मन में श्रद्धा और सकारात्मक भाव पैदा होते हैं।

दुर्गा जी की आरती: ॐ जय अम्बे गौरी…

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी ।

तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को ।

उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै ।

रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी ।

सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती ।

कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योती ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती ।

धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे ।

मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी ।

आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों ।

बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता,

भक्तन की दुख हरता । सुख संपति करता ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

भुजा चार अति शोभित, खडग खप्पर धारी ।

मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती ।

श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे ।

कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी ।

अम्बे तू है जगदम्बे काली: माँ दुर्गा, मां काली आरती (Ambe Tu Gagdambe Kali Lyrics)

अम्बे तू है जगदम्बे काली,

जय दुर्गे खप्पर वाली।

तेरे ही गुण गाएँ भारती,

ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

तेरे भक्त जनो पर माता, भीर पडी है भारी।

दानव दल पर टूट पड़ो माँ, करके सिंह सवारी॥

सौ-सौ सिहों से बलशाली, है अष्ट भुजाओं वाली,

दुष्टों को पल में संहारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

माँ-बेटे का है इस जग में, बड़ा ही निर्मल नाता।

पूत-कपूत सुने है पर ना, माता सुनी कुमाता॥

सब पे करूणा दर्शाने वाली, अमृत बरसाने वाली।

दुखियों के दुखड़े निवारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

नहीं मांगते धन और दौलत, न चांदी न सोना।

हम तो मांगें तेरे चरणों में, इक छोटा सा कोना॥

सबकी बिगड़ी बनाने वाली, लाज बचाने वाली,

सतियों के सत को संवारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

चरण शरण में खड़े तुम्हारी, ले पूजा की थाली।

वरद हस्त सर पर रख दो माँ, संकट हरने वाली॥

माँ भर दो भक्ति रस प्याली, अष्ट भुजाओं वाली।

भक्तों के कारज तू ही सारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

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