कुंडली में प्रमुख राजयोग: गजकेसरी, वेशी, उभयचारी योग का फल

जानें कुंडली में बनने वाले प्रमुख राजयोग जैसे गजकेसरी, वेशी, उभयचारी और महाभाग्य योग। पढ़ें इनके प्रभाव, लाभ और व्यक्तित्व की विशेषताएं।

Published On 2026-06-24 17:31 GMT   |   Update On 2026-06-24 17:31 GMT

कुंडली में बनने वाले प्रमुख राजयोग: जानें गजकेसरी, वेशी, उभयचारी, महाभाग्य और केसरी योग वाले लोगों का व्यक्तित्व

वैदिक ज्योतिष में कुछ विशेष ग्रह संयोगों को राजयोग कहा जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ये योग व्यक्ति को सफलता, सम्मान, धन और समाज में प्रतिष्ठा दिलाने वाले माने जाते हैं। हालांकि किसी भी योग का प्रभाव ग्रहों की शक्ति, दशा और संपूर्ण कुंडली पर निर्भर करता है।

शुभ वेसी योग में जन्मे लोग

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ये योग सूर्य के कारण बनते हैं। जब जन्म कुंडली में सूर्य से ठीक दूसरे भाव में कोई शुभ ग्रह यानी बुध, शुक्र या गुरु होता है, तो इस शुभ वेसी योग का निर्माण होता है। हालांकि इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि इस भाव में चंद्रमा, राहु और केतु नहीं होने चाहिए। इस योग में जन्मे जातक काफी सुंदर, सुखी, गुणनिधि, धीर होते हैं। ये धार्मिक प्रवृत्ति के होते हैं। इनकी नेतृत्व क्षमता काफी मजबूत होती है, जिससे ये लीडर के तौर पर काफी अच्छे से काम करते हैं। इन व्यक्तियों की यश में वृद्धि होती है। वह सुंदर, दाता, राजा का प्रिय यानी अच्छे ओहदे में होने के साथ-साथ विद्वान होते है। उसका शरीर श्यामवर्णी होता है।

उभयचरी योग में जन्मे लोग

जब जन्म कुंडली में सूर्य के दूसरे और बारहवें भाव के आगे और पीछे दोनों घरों में बुध, शुक्र, गुरु, मंगल या शनि विराजमान हों, तो उभयचरी योग का निर्माण होता है। इस बात का ध्यान रखें कि सूर्य के आगे या पीछे भाव में चंद्रमा, राहु और केतु न हो। उभयचरी योग में जन्मे जातकों को राजसी सुख की प्राप्ति हो सकती है। ये अपनी वाणी से समाज में मान-सम्मान पाते हैं। इन्हें बोलना काफी पसंद होता है। ये धनवान और यशस्वी होते हैं। हर कोई इनकी प्रसन्नता करता है।

महाभाग्य में जन्मे जातक

बता दें कि जन्म कुंडली में महाभाग्य योग का निर्माण तब होता है, जब जातक का जन्म दिन के समय यानी सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच हुआ हो या फिर जन्म कुंडली का लग्न, सूर्य और चंद्रमा तीनों विषम राशियां मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु या कुंभ में स्थित हों। फलदीपिका मंत्रेश्वर के अनुसार, जिस व्यक्ति का जन्म महाभाग्य में होता है, तो उसकी आंखें काफी सुंदर होती है। ये काफी विख्यात होने के साथ निर्मल चरित्र वाले होते हैं।

आने वाले समय में ये राजा के साथ सुख पाते हैं और कई संपत्ति, घर के मालिक बनते हैं। वहीं दूसरी ओर जिन स्त्रियों की कुंडली में ये योग हता है, तो वह उच्च चरित्र वाली, भाग्यशाली होने के साथ-साथ धनवान होती है।  पति, पुत्र, पौत्रों का सुख उन्हें चिरकाल तक प्राप्त होता है और वे सदैव सौभाग्यवती रहती हैं।

महाभाग्ये जातः सकलनयनानंदजनको

वदान्यो विख्यातः क्षितिपतिरशीत्यायुरयम:।

वधूनां योगीशस्मिन् सति धनसुमाग्डल्यसहिता

चिरं पुत्रैः पौत्रैः शु भमुपगता सा सुचरिता।। (15)

केसरी योग में जन्मे लोग

केसरी योग को गजकेसरी योग भी कहा जाता है। जब जन्म कुंडली में गुरु और चंद्रमा की युति एक ही भाव में होती है या फिर चंद्रमा जिस भाव में स्थित है, उससे 1, 4, 7, या 10वें घर में गुरु बृहस्पति मौजूद होते हैं। इस राजयोग का निर्माण होता है। इसके विपरीत, गुरु से 1, 4, 7, या 10वें भाव में चंद्रमा होने पर भी यह योग बनता है।

फलदीपिका के अनुसार इस योग में जन्मे व्यक्ति शेर के सामान अपने शत्रुओं पर हावी होते हैं और उस पर विजय पाते हैं। ऐसा व्यक्ति सभाओं में भाषण देकर लोगों को प्रेरित करता है। किसी विषय पर गंभीरता पूर्वक और अधिकार से बोलने प्रौढ़ भाषण कहलाता है। भाषण करने वाला, राजाओं, राजपुरुषों या शाही वर्ग का आचरण, जीवन-शैली या शासन करने वाले होते हैं। ऐसा व्यक्ति दीर्घायु हो। इसके अलावा ऐसे व्यक्ति की बुद्धि काफी तेज होती है और काफी यश पाता है। ये हर क्षेत्र में सफल होते हैं।

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