यमुनोत्री धाम 2026: चारधाम यात्रा की पहली सीढ़ी, जानें महत्व, इतिहास और कैसे पहुंचें

यमुनोत्री धाम उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में स्थित एक पवित्र तीर्थ है और चारधाम यात्रा का पहला पड़ाव माना जाता है। मां यमुना को समर्पित इस मंदिर के कपाट 2026 में अक्षय तृतीया (19 अप्रैल) से खुल चुके हैं। जानें यमुनोत्री धाम का धार्मिक महत्व, इतिहास, यात्रा का सही समय और यहां तक पहुंचने का पूरा मार्ग।

Published On 2026-04-20 16:43 GMT   |   Update On 2026-04-20 16:43 GMT

यमुनोत्री धाम 2026: जानें महत्व, इतिहास और कैसे पहुंचें, चारधाम यात्रा की पहली सीढ़ी

Yamunotri Temple Uttarakhand (Char Dham Yatra 2026): उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में स्थित यमुनोत्री मंदिर हिंदू धर्म के सबसे पवित्र तीर्थों में से एक है।मां यमुना को समर्पित यह मंदिर हर साल लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। यह मंदिर समुद्र तल से लगभग 3,293 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, जहां पहुंचते ही श्रद्धालुओं को अद्भुत शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है। ऐसी मान्यता है कि यहां दर्शन और स्नान करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। वहीं साल 2026 में यमनोत्री के कपाट अक्षय तृतीया के दिन यानी 19 अप्रैल को खुल गए हैं। मतलब भक्त अब यमनोत्री की यात्रा कर सकते हैं।  यह चारधाम यात्रा की शुरुआत का पहला धाम माना जाता है

मां यमुना का माना जाता है उद्गम स्थल

यमुनोत्री माता यमुना को समर्पित है, जिन्हें सूर्य देव और संज्ञा की पुत्री और यमराज की बहन माना जाता है। मान्यता है कि जो भक्त यमुना जी में स्नान करते हैं या उनके दर्शन करते हैं, उन्हें मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है और पापों का नाश होता है। मान्यता है कि यहां से बहने वाली यमुना नदी का उद्गम यमुनोत्री ग्लेशियर से होता है। यहां स्थित सूर्य कुंड का गर्म पानी और दिव्य शिला श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है। भक्त यहां प्रसाद के रूप में चावल या आलू गर्म कुंड में पकाकर चढ़ाते हैं।

कैसे पहुंचे यमनोत्री धाम

यमुनोत्री पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी एयरपोर्ट जॉली ग्रांट एयरपोर्ट है, यहां से बस द्वारा जानकी चट्टी तक पहुंचा जा सकता है। वहीं यमनोत्री नजदीकी रेलवे स्टेशन देहरादून रेलवे स्टेशन और ऋषिकेश रेलवे स्टेशन हैं। साथ ही अगर हम सड़क मार्ग की बात करें तो देहरादून, ऋषिकेश और हरिद्वार से बस/टैक्सी द्वारा जानकी चट्टी पहुंच सकते हैं। वहां से पैदल, घोड़ा, पालकी या पिट्ठू की सुविधा मिलती है। साथ ही यहां से लगभग 5-6 किमी का ट्रेक करके मंदिर तक पहुंचा जाता है।

यमनोत्री धाम की यात्रा मई-जून और सितंबर-अक्टूबर यात्रा के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है, जबकि जुलाई-अगस्त में भारी बारिश और भूस्खलन का खतरा रहता है। इसलिए इस समय यात्रा करने से बचना चाहिए।

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