हनुमान धारा मंदिर, चित्रकूट: इतिहास, महत्व और कैसे पहुंचें

हनुमान धारा उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित पवित्र तीर्थ नगरी चित्रकूट में स्थित भगवान हनुमान का एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है और यहां की सबसे बड़ी विशेषता हनुमान जी की प्रतिमा पर निरंतर बहने वाली जलधारा है, जिसके कारण इसे "हनुमान धारा" कहा जाता है।

क्या है हनुमान धारा की मान्यता?

पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान हनुमान ने लंका दहन किया था, तब उनके शरीर में अग्नि की तीव्र तपन बनी रही। इसके बाद भगवान श्रीराम ने उन्हें चित्रकूट आने का निर्देश दिया। मान्यता है कि हनुमान जी ने यहां तपस्या की और तभी पहाड़ से शीतल जलधारा प्रकट हुई, जिसने उनके शरीर की जलन शांत कर दी। तभी से इस स्थान को “हनुमान धारा” कहा जाने लगा।

यहां स्थित विशाल हनुमान प्रतिमा के ऊपर दो कुंड बने हुए हैं, जिनसे निरंतर जल बहता रहता है। भक्तों का विश्वास है कि इस जलधारा के दर्शन और स्नान से मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है।

हनुमान धारा का धार्मिक महत्व

चित्रकूट को भगवान श्रीराम की तपोस्थली माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि वनवास के दौरान भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण ने अपने 14 वर्षों में से लगभग 11 वर्ष चित्रकूट में बिताए थे। हनुमान धारा इसी पवित्र भूमि का प्रमुख तीर्थ स्थल है।

यह स्थान केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक सुंदरता के कारण भी प्रसिद्ध है। पहाड़ी पर चढ़ते समय श्रद्धालुओं को चित्रकूट का मनोरम दृश्य देखने को मिलता है। मंदिर के आसपास कई छोटे-छोटे मंदिर और पौराणिक स्थल मौजूद हैं, जिनमें सीता रसोई भी प्रमुख है।

कैसे पहुंचें?

रेल मार्ग

निकटतम रेलवे स्टेशन:

चित्रकूट धाम कर्वी रेलवे स्टेशन

यह स्टेशन दिल्ली, प्रयागराज, वाराणसी और सतना जैसे शहरों से जुड़ा हुआ है

हवाई मार्ग

निकटतम हवाई अड्डे:

प्रयागराज एयरपोर्ट

खजुराहो एयरपोर्ट

सड़क मार्ग

हनुमान धारा चित्रकूट नगर से लगभग 5 किलोमीटर दूर स्थित है। यहां टैक्सी, ऑटो और निजी वाहन से आसानी से पहुंचा जा सकता है।

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