डुल्या मारुति मंदिर, पुणे: जानें इतिहास, धार्मिक महत्व, पानीपत युद्ध से जुड़ी कथा और कैसे पहुंचें
महाराष्ट्र के पुणे में स्थित डुल्या मारुति मंदिर भगवान हनुमान को समर्पित एक प्राचीन और प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। जानें डुल्या मारुति मंदिर का इतिहास, तीसरे पानीपत युद्ध से जुड़ी रोचक मान्यता, मंदिर की विशेषताएं, धार्मिक महत्व और यहां तक पहुंचने का आसान मार्ग। पढ़ें क्यों यह मंदिर पुणे के प्रमुख हनुमान मंदिरों और श्रद्धा के केंद्रों में गिना जाता है।
डुल्या मारुति मंदिर, पुणे: इतिहास, महत्व और कैसे पहुंचें
डुल्या मारुति मंदिर महाराष्ट्र के पुणे शहर के गणेश पेठ क्षेत्र में स्थित भगवान हनुमान को समर्पित एक अत्यंत प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर पुणे के ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों में गिना जाता है और स्थानीय लोगों के बीच गहरी आस्था का केंद्र माना जाता है।
मंदिर का इतिहास
इतिहासकारों और स्थानीय परंपराओं के अनुसार, मंदिर की स्थापना संत समर्थ रामदास से जुड़ी मानी जाती है। ‘डुल्या’ शब्द का अर्थ है ‘झूलना’ या ‘हिलना’। लोककथाओं के मुताबिक, वर्ष 1761 में हुए तीसरे पानीपत युद्ध में मराठों की हार की खबर मिलने पर मंदिर में स्थापित हनुमान प्रतिमा शोक में हिलने लगी थी। इसी घटना के बाद इस मंदिर को “डुल्या मारुति” के नाम से जाना जाने लगा। हालांकि इस कथा का ऐतिहासिक प्रमाण सीमित है, लेकिन यह मान्यता आज भी श्रद्धालुओं के बीच लोकप्रिय है।
पुणे के ऐतिहासिक मारुति मंदिरों में डुल्या मारुति का विशेष स्थान माना जाता है। कई स्रोत इसे शहर के संरक्षक देवस्थानों में भी शामिल बताते हैं। मंदिर की लगभग पांच फीट ऊंची काले पत्थर की प्रतिमा पश्चिमाभिमुख है और मंदिर का अधिकांश ढांचा पत्थर से निर्मित है।
कैसे पहुंचे मंदिर?
डुल्या मारुति मंदिर पुणे शहर के बीच में स्थित है, इसलिए यहां पहुंचना काफी आसान है। मंदिर से पुणे रेलवे स्टेशन लगभग 2 किलोमीटर दूर है। वहीं पुणे इंटरनेशनल एयरपोर्ट मंदिर से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। वहीं आपको बता दें कि लक्ष्मी रोड, गणेश पेठ और नाना पेठ क्षेत्र से ऑटो, टैक्सी और स्थानीय बसों के जरिए आसानी से मंदिर पहुंचा जा सकता है।