देवीपाटन मंदिर (मां पाटेश्वरी धाम): 51 शक्तिपीठों में शामिल इस पवित्र मंदिर का इतिहास, धार्मिक महत्व और यात्रा गाइड

देवीपाटन मंदिर या मां पाटेश्वरी धाम उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ है। जानें देवीपाटन मंदिर का इतिहास, धार्मिक महत्व, माता सती से जुड़ी पौराणिक कथा, नवरात्रि में मंदिर की विशेषता, दर्शन का महत्व, मंदिर तक पहुंचने का आसान मार्ग, निकटतम रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट की जानकारी। पढ़ें मां पाटेश्वरी धाम से जुड़ी संपूर्ण जानकारी।

Published On 2026-06-15 16:06 GMT   |   Update On 2026-06-15 16:06 GMT

देवीपाटन मंदिर (मां पाटेश्वरी धाम): इतिहास, महत्व और कैसे पहुंचें

देवीपाटन मंदिर, जिसे मां पाटेश्वरी धाम भी कहा जाता है, उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले के तुलसीपुर क्षेत्र में स्थित एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ है। यह मंदिर मां दुर्गा को समर्पित है और 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। यहां भारत के साथ-साथ नेपाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।

साथ ही यह प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां पाटेश्वरी को समर्पित है, जहां सालभर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। खासतौर पर चैत्र और शारदीय नवरात्रि में यहां भव्य मेले का आयोजन होता है। नेपाल सहित देश के कई राज्यों से भक्त माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। आइए जानते हैं मंदिर का इतिहास और महत्व…

देवीपाटन मंदिर का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवीपाटन मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि जब माता सती ने दक्ष यज्ञ में अपने प्राण त्याग दिए थे, तब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उनके शरीर के टुकड़े किए। इसी दौरान माता का दाहिना स्कंध (कंधा) और पट यहां गिरा था, इसलिए इस स्थान को देवीपाटन कहा गया।

नवरात्रि में उमड़ती है भक्तों की भीड़

चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दौरान देवीपाटन मंदिर में लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इस दौरान मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया जाता है और विशाल मेला लगता है।

कैसे पहुंचे देवीपाटन मंदिर?

आपको बता दें कि देवीपाटन मंदिर बलरामपुर जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर तुलसीपुर क्षेत्र में स्थित है। यहां सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। साथ ही सबसे पास रेलवे स्टेशन तुलसीपुर और बलरामपुर हैं। यहां से टैक्सी और बस की सुविधा मिल जाती है। वहीं सबसे पास एयरपोर्ट गोरखपुर और लखनऊ हैं। वहां से सड़क मार्ग के जरिए मंदिर पहुंचा जा सकता है।

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